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LIC में हिस्सा बिक्री की कोशिश तेज, DIPAM ने ट्रांजैक्शन एडवाइजर के लिए मंगाई बोली

LIC में सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बेचने की तरफ कदम बढ़ा लिया है। इसके लिए सरकार initial public offer लाएगी।
अपडेटेड Jun 20, 2020 पर 14:01  |  स्रोत : Moneycontrol.com

64 साल पुरानी LIC में सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बेचने की तरफ कदम बढ़ा लिया है। इसके लिए सरकार initial public offer यानी IPO लाएगी। विनिवेश विभाग दीपम ने IPO से पहले के लिए ट्रांजैक्शन एडवाइजर की बोली मंगाई है। बोली सौंपने की आखिरी तारीख है 13 जुलाई है। माना जा रहा है कि चालू कराबोरी साल के आखिर में सरकार LIC का IPO लाएगी। हालांकि सरकार कितनी हिस्सेदारी बेचेगी अभी साफ नहीं किया है। लेकिन ये तय है कि अभी कुछ हिस्सा ही सरकार बेचेगी। सरकार ने बजट में ऐलान किया था कि वो LIC में हिस्सेदारी बेचेगी। हालांकि सरकार ने उस वक्त ही साफ कर दिया कि LIC के पॉलिसी धारकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। LIC की पॉलिसी की सरकार सोवरेन गारंटी लेगी। बजट में सरकार ने LIC और IDBI में हिस्सेदारी बेचकर कुल 90 हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है।


सरकार ने 2 प्री IPO ट्रांजैक्शन एडवाइजरों की नियुक्ति के लिए बोली मंगवाई है। इस बात की संभावना है कि सरकार लिस्टिंग प्रक्रिया के जरिए LIC में 8 से 10 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री कर सकती है।


LIC की वैल्यू 9 से 10 लाख करोड़ रुपये के बीच है। इसको देखते हुए अगर सरकार LIC में अपनी सिर्फ 8 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री करती है तो यह IPO 80,000 से 90,000 करोड़ रुपये के आसपास हो सकता है। इस इश्यू के साइज को देखते हुए 2 एडवाइजरों की नियुक्ति की जाएगी। इस बात की संभावना है कि यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा।


LIC के आकार को ध्यान में रखते हुए इस बात की उम्मीद बहुत कम  है कि यह IPO वित्त वर्ष 2021 में आ पाएगा। इस देरी में कोरोना वायरस के असर का भी हाथ है।


गौरतलब है कि LIC लाइफ इंश्योरेंस के कारोबार में 1956 से है और इसके बैलेंसशीट का आकार 31 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। डेट और इक्विटी में इसके कुल निवेश की मात्रा 25 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।


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