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राजस्व के लिए शराब बिक्री, सरकार की विनाशकाले विपरीत बुद्धिः अण्णा हजारे

अण्णा हजारे का कहना है कि लॉकडाउन की अवधि में लोग भूख से परेशान हैं इसलिए गरीब लोगों को राशन एवं जीवनावश्यक वस्तुओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
अपडेटेड May 08, 2020 पर 10:11  |  स्रोत : Moneycontrol.com

लॉकडाउन के दरम्यान के राजस्व के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा शराब बिक्री की परमिशन दिये जाने पर प्रसिद्ध समाजसेवी अण्णा हजारे ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सरकार के इस निर्णय का विरोध किया है और कहा कि  शराब कोई जीवनावश्यक वस्तु नहीं है कि लोगों को नहीं मिलेगी तो लोग भूखे मर जायेंगे। फिर सरकार को अचानक ये निर्णय क्यों लेना पड़ा। इससे कोरोना संकट और बढ़ने की संभावना है।


अण्णा हजारे ने सरकार से प्रश्न किया कि वर्तमान परिस्थितियों में शराब की बिक्री करके सरकार को क्या मिलेगा। शराब बिक्री से प्राप्त होने वाले राजस्व की तुलना में कोरोना का संकट अधिक बढ़ गया तो उस राजस्व का क्या अर्थ है। वैसे भी पिछले डेढ़ महीने से शराब की बिक्री बंद थी तो शराब नहीं पीने से क्या नुकसान हो गया। जबकि शराब नहीं मिलने से मजबूर होकर लोग शराब की लत से छुटकारा पा रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को बचाने का उपाय करना चाहती है कि राजस्व कमाने का मार्ग खोज रही है। ये तो विनाशकाले विपरीत बुद्धि जैसा काम होगा।


महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक अण्णा हजारे का कहना है कि लॉकडाउन की अवधि में लोग भूख से परेशान हैं इसलिए गरीब लोगों को राशन एवं जीवनावश्यक वस्तुओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस समय हजारों परिवार ऐसे हैं जो रोज कमाते और रोज खाते हैं। उनको राशन नहीं है और दूसरा कोई सहारा भी नहीं है। उनको सहारा देने की बजाय सरकार नशा करने वालों का शौक पूरा करने के लिए शराब की दुकानें खोल रही है ये दुर्भाग्यपूर्ण है।


उन्होंने आगे कहा कि वे कई सालों से शराबबंदी की मांग कर रहे हैं। वैसे भी इस समय लॉक डाउन के कारण शराब नहीं मिलने से देश में शराब की वजह से होने वाले झगड़े, मारपीट, चोरी, महिलाओं पर अत्याचार और अन्य प्रकार के गुनाहों में काफी कमी देखने को मिली है। इसलिए ऐसे समय में और कोरोना संकट के काल में शराब की दुकाने खोलना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है।


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