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मंडियां बंद होने से भी सप्लाई प्रभावित, सप्लाई घटने से बढ़ने लगे जरूरी चीजों के दाम

कोरोना वायरस से लड़ाई के लिए लॉकडाउन का असर अब खाने-पीने की चीजों पर भी पड़ने लगा है
अपडेटेड Apr 09, 2020 पर 09:00  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कोरोना वायरस से लड़ाई के लिए लॉकडाउन का असर अब खाने-पीने की चीजों पर भी पड़ने लगा है। खाने-पीने की चीजों की सप्लाई में भारी गिरावट आई है। मजदूरों की कमी से इडेबल ऑयल, आटा-चालव, दाल की मिलों में कामकाज ठप पड़ गया है। खेतों से सब्जियों की सप्लाई नहीं होने से किसान परेशान है। इन पर बातचीत के लिए सीएनबीसी-आवाज़ के साथ CNBC TV-18 की कमोडिटी एडिटर मनीषा गुप्ता, बीजेपी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पाशा पटेल और एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट विजय सरदाना जुड़ गये हैं।


लॉकडाउन में जरूरी चीजों की सप्लाई चेन बाधित हुई है और चीजों की कमी हो गई है। ऊपर से जमाखोरी और काला बाजारी भी हो रही है। ऐसे में केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वो एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत सख्ती करे और जमाखोरी पर रोक लगाए।


जरूरी चीजों की सप्लाई में कमी


आटा, दाल, खाने के तेल की सप्लाई पर असर पड़ने की संभावना है। मजदूरों की कमी से जरूरी चीजों की सप्लाई पर असर हुआ है। मजदूरों की कमी से खाने के तेलों की प्रोसेसिंग 40 प्रतिशत घटी है। फ्लोर मिल्स भी 40-50 प्रतिशत की क्षमता पर काम कर रही हैं। गेहूं की कमी होने से फ्लोर मिल्स के कामकाज पर असर पड़ा है। वहीं देश की करीब 70 प्रतिशत दाल मिलों में कामकाज ठप पड़ा है। मजदूरों की कमी से रबी फसलों की कटाई पर असर हुआ है। उधर मंडियां बंद होने से भी खाने-पीने की सप्लाई पर असर हुआ है।


जमाखोरी पर लगाम


संकट के समय में जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए गृह सचिव ने राज्यों के मुख्य सचिवों को चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने जमाखोरी, ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगाने को कहा है। इसके साथ ही एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू करने के निर्देश दिये हैं। लॉक डाउन के चलते कुछ वस्तुओं की सप्लाई में कमी आई है। इसलिए स्टॉक लिमिट, कीमतें तय करने के विकल्प आजमाएं जाने चाहिए। एक्ट लागू करने से जमाखोरी करने वालों को 7 साल की सजा हो सकती है।


जरूरी चीजों के दाम बढ़े


लॉकडाउन के चलते देश में दाल, खाने के तेल के थोक दाम 3-4 प्रतिशत बढ़े हैं। लोगों के जरूरी सामान जमा करने की वजह से दाम बढ़े हैं। लॉकडाउन में लोग जरूरी चीजें जमा कर रहे हैं।


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