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मिडवाइव्स कराएंगी नॉर्मल डिलीवरी

प्रकाशित Thu, 14, 2019 पर 12:45  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकारी अस्पतालों में नॉर्मल डिलीवरी अब डॉक्टर नहीं कराएंगे। ये जिम्मेदारी मिडवाइव्स की होगी। प्रेग्नेंसी के सिर्फ जटिल मामले ही मेडिकल ऑफिसर को दिए जाएंगे। सरकारी अस्पतालों में नार्मल डिलीवरी कराने की जिम्मेदारी अब मिडवाइव्स के कंधों पर होगी। देश में चिकित्सकों की कमी के दौरान बड़ी संख्या में माताओं और नवजातों की मौत को देखते हुए सरकार ने ये फैसला लिया है। प्रेग्नेंसी के जटिल मामलों को ही गाइनोकलॉजिस्ट को रेफर किया जाएगा। निर्णय के मुताबिक सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में नॉर्मल डिलीवरी कराने की जिम्मेदारी मिडवाइव्स की होगी। 4 साल की बीएससी नर्सिंग करने के बाद 1.5 साल का एक अलग से ट्रेनिंग कोर्स कराया जाएगा। ट्रेनिंग कोर्स पूरा होने के बाद छात्र-छात्राएं मिडवाइव्स कहलाएंगी। डिलीवरी कराने से लेकर नवजात की शुरुआती देखभाल, स्क्रीनिंग और इलाज की जिम्मेदारी भी इनके पास होगी।


मई-जून तक नर्सेज को मिडवाइव्स बनाने की ट्रेनिंग देने वाले ट्यूटर की ट्रेनिंग शुरु हो जाएगी। इसके लिए देश में 6 से 7 राष्ट्रीय और क्षेत्रीय इंस्टीट्यूट की पहचान की गई है। सरकार को उम्मीद है कि अगर सभी नॉर्मल डिलीवरी मिडवाइव्स की देख-रेख में होगी तो देश में करीब 83 फीसदी मां, नवजात की मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। वहीं इस निर्णय के बाद बड़े अस्पतालों में मरीजों की भीड़ भी कम हो जाएगीI हालांकि इस फैसले को लेकर चिकित्सकों की अपनी चिंताएं हैं। देश में अभी 79 फीसदी डिलीवरी ही अस्पताल और स्वास्थ्य केन्द्रों में हो पा रही है। सुरक्षा से जुड़े सवालों के बीच मिडवाइव्स को दी गई ये जिम्मेदारी कारगर साबित हो सकती है।