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28 फीसदी तक बढ़ सकता है न्यूनतम वेतन, सरकार लागू करेगी वेज कोड

सरकार न्यूनत वेतन बढ़ाने के लिए कई जान माने विशेषज्ञों की सलाह पर एक मसौदा तैयार कर रही है।
अपडेटेड Nov 06, 2019 पर 15:49  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केंद्र सरकार अब न्यूनतम वेतन पर एक मसौदा तैयार कर रही है। जिसे 4 महीने के भीतर अंतिम रूप दिया जाना तय किया गया है। सरकार नए मानक के आधार पर ये मसौदा तैयार कर रही है। जिसमें 28 फीसदी तक वेतन बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इस मसौदे को कई विशेषज्ञ मिलकर तैयार कर रहे हैं।


इस मसौदे में कहा गया है कि सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड (केंद्रीय सलाहकार बोर्ड) पहली बार वेतन तय करेगा। जो कि सेंट्रल और स्टेट (राज्य) में नई न्यूनत मजदूरी को लागू करेगा। 2019 मजदूरी कोड एक वैधानिक राष्ट्रीय मजदूरी मुहैया कराती है। इससे कम कोई भी स्टेट बॉडी (राज्य निकाय) या एम्प्लॉयर (नियोक्ता) तय नहीं कर सकता। इसे चार महीने के भीतर सलाह और सुझावों के बाद अंतिम रूप दिए जाने की योजना बनाई गई है।
हालांकि अभी वेतन मानदंड को एक एडवाइजरी बोर्ड पर छोड़ दिया गया है। जो कि न्यूनतम मजदूरी देने के लिए गाइडलाइंस जारी करते हैं।


Xavier Labour Relations Institute, Jamshedpur, के प्रो, के. आर श्याम के मुताबिक, निर्धारित मानदंड़ों का पालन करते हुए इसका कैलकुलेशन किया जाना चाहिए। मजदूरी वेतन जब 14 से 28 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाए तो 200 रुपये 225 रुपये के बीच मजदूरी होनी चाहिए। कुछ राज्यों में न्यूनतम मजदूरी 175 रुपये प्रति दिन है। ये मसौदा उनके लिए लागू होगा जो शिफ्ट में 9 घंटे के हिसाब से काम करते हैं। 


बता दें कि सातवें वेतय आयोग 2015 में न्यूमत मजदूरी 18,000 रुपये प्रति माह केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी निर्धारित की गई थी। य वेतन महीने में 26 दिन काम करने वालों पर 692 रुपये प्रति दिन के हिसाब से तय किया गया था।


लेबर मिनिस्ट्री के एक अधिकारी के मुताबिक, सातवें वेतन आयोग कि सिफारिश पर 18,000 रुपये न्यूनतम वेतन तय किया गया है, जो कि वतेन वृद्धि के मापदंड के लिए जरूरी होगा।


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