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मोदी सरकार का सबसे बड़ा रिफॉर्म, अब कॉरपोरेट इंडिया के काम की बारी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने एक झटके से इंडस्ट्री के सारे दुख दूर कर दिए।
अपडेटेड Sep 22, 2019 पर 15:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने एक झटके से इंडस्ट्री के सारे दुख दूर कर दिए। कॉरपोरेट टैक्स में सरकार ने जिस तरह की छूट दे दी है, उसपर कहना पड़ेगा कि ये वक्त से पहले और किस्मत से ज्यादा है। सुबह तक बात हो रही थी इकोनॉमी में सुस्ती की और अब बात हो रही है कि निवेश कितना बढ़ेगा, रोजगार कितना बढ़ेगा और भारत कितना बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा। दरअसल, मोदी सरकार का ये मास्टर स्ट्रोक सुस्ती का इलाज नहीं है, बल्कि रिफॉर्म का वो विटामिन है जिसका इकोनॉमी को लंबे समय से इंतजार था। तो क्या वित्त मंत्री की तरफ से ये BIG, BOLD और BEAUTI FUL एलानों की बरसात इकोनॉमी में चौतरफा हरियाली लाएगी।


सभी घरेलू कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स 22 प्रतिशत कर दिया गया है। इमतलब सरचार्ज और सेस मिलाकर पहले जो कंपनियां 29 प्रतिशत और 34 प्रतिशत कॉरपोरेट टैक्स दे रही थीं, उन्हें अब 25 प्रतिशत टैक्स देना होगा। ये सुधार 1 अप्रैल 2019 से लागू है, इसलिए चुकाए जा चुके टैक्स पर रिफंड भी मिलेगा। यही नहीं सभी तरह की कंपनियां को मिनिमम ऑल्टरेटिव टैक्स से छूट मिल गई है। और 2023 तक मैन्युफैक्चरिंग में आने वाली नई कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स 15 प्रतिशत होगा।


FPIs को सिक्योरिटी और डिरेवेटिव्स पर बढ़े हुए सरचार्ज से मुक्ति।
5 जुलाई तक शेयर बायबैक का फैसला कर चुकी लिस्टेड कंपनियों को टैक्स छूट। कंपनियों के लिए 2 प्रतिशत अनिवार्य CSR का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। सरकार ये बड़ी छूटें देने के बदले 1 लाख 45 हजार करोड़ का घाटा उठाएगी। वित्तीय घाटे पर चिंता के दौर में इस बोझ की जरूरत पर बहस हो सकती है। लेकिन ऐसे बड़े रिफॉर्म का असर क्या हो सकता है, इसकी एक झलक शेयर बाजार में दिखाई। एलान के बाद बाजार ने 10 साल का सबसे अच्छा कारोबार किया। एक दिन में निफ्टी का मार्केट कैप 4 लाख पंद्रह हजार करोड़ और सेंसेक्स का मार्केट कैप 3 लाख 42 हजार करोड़ बढ़ गया।


बाजार से लेकर इंडस्ट्री तक के दिग्गज इस फैसले को क्रांतिकारी बता रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया है कि पिछले कुछ दिनों में जिन रिफॉर्म्स का एलान हुआ है वो भारत को बिजनेस करने की मुफीद जगह बनाएंगे, समाज के हर वर्ग को मौका देंगे और देश को 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाएंगे। तो क्या माना जाए कि इकोनॉमी के मोर्चे पर सरकार ने अपना काम कर दिया है और अब इंडिया इंक के सामने कर दिखाने की बारी है? क्या इन रिफॉर्म्स से आर्थिक सुस्ती छू मंतर हो जाएगी? और सबसे बड़ा सवाल 1 लाख 45 हजार करोड़ के अतिरक्त बोझ के साथ सरकार वित्तीय घाटे का लक्ष्य कैसे मेंटेन कर पाएगी?