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अपने देश के खिलाफ कोर्ट में Tiktok की पैरवी करने से मुकुल रोहतगी का इनकार

पूर्व एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने ये कहते हुए टिकटॉक का पक्ष रखने से इनकार कर दिया है वे अपने ही देश के खिलाफ कंपनी की तरफ से पैरवी नहीं कर सकते हैं।
अपडेटेड Jul 02, 2020 पर 11:09  |  स्रोत : Moneycontrol.com

टिकटॉक सहित 59 चीनी ऐप्स पर भारत सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाये जाने से चीन बौखलाया है और ये चीनी कंपनियां प्रतिबंध से बचने के लिए कानूनी मार्ग खोज रही हैं। ऐसे में टिकटॉक द्वारा देश के विरुद्ध कंपनी का पक्ष का कोर्ट में रखने से देश के पूर्व एटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया मुकुल रोहतगी ने इनकार कर दिया है।


पूर्व एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने ये कहते हुए टिकटॉक का पक्ष रखने से इनकार कर दिया है वे अपने ही देश के खिलाफ कंपनी की तरफ से पैरवी नहीं कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए 59 चीनी ऐप्स पर प्रतितबंध लगा दिया है। ऐसे में रोहतगी ने स्पष्ट किया है कि यदि इस मामले में केंद्र सरकार के खिलाफ याचिका दायर की जाती है तो वे कंपनी की तरफ से पैरवी नहीं करेंगे।


सरकार द्वारा प्रतिबंध का आदेश दिये जाने के बाद से टिकटॉक, हैलो सहित चीन के ऐप्स प्ले स्टोर से हटाये गये हैं। भारतीय यूजर्स के लिए ये ऐप्स अब उपलब्ध नहीं हैं। यूजर्स के डेटा की सुरक्षा का हवाला देते हुए इन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया गया है। लेकिन टिकटॉक कहना है कि भारतीय कानून के अनुसार यूजर्स के डेटा की निजता का खयाल रखा जाता है। टिकटॉक ने कहा है कि कंपनी ने किसी भी दूसरे देश या चीन को भारतीय यूजर्स का डेटा उपलब्ध नहीं कराया है।


महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक टिकटॉक का पक्ष बताने वाले पत्र पर भारत में टिकटॉक के प्रमुख निखिल गांधी ने हस्ताक्षर किये थे। टिकटॉक, हैलो, शेयर इट, कैम स्कैनर जैसे करोड़ों यूजर्स वाले ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया गाय है। टिकटॉक पिछले कुछ दिनों से सबसे लोकप्रिय चीनी ऐप्स के रूप में स्थापित हुआ था। वहीं ये प्रतिबंध अंतरिम है और संबंधित कंपनियों के प्रमुखों को सरकार के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जायेगा ऐसा सरकार का कहना है।


केंद्र सरकार के इस निर्णय से चीन में बौखलाहट मच गई है। चीन का कहना है कि ये अमेरिका की नकल करने वाला फैसला है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में कहा गया है ये भारत की ये निर्णय उसके अमेरिका से नजदीकी बढ़ाने का प्रयास है। अमेरिका ने राष्ट्रवाद के नाम पर चीनी सामानों पर प्रतिबंध लगाना  शुरू किया है हालांकि भारत के इस फैसले से उसकी इकोनॉमी पर असर होगा ऐसा ग्लोबल टाइम्स का कहना है।


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