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मल्टीप्लेक्स चेन पीवीआर की राइट्स इश्यू लाने की योजना

मनीकंट्रोल को सूत्रों से जानकारी मिली है कि पीवीआर (PVR)सिनेमाज ने एक्सिस कैपिटल (Axis Capital) को इस प्रस्तावित राइट्स इश्यू के लिए मर्चेट बैकर न्यूक्त किया है।
अपडेटेड May 22, 2020 पर 16:45  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारत की सबसे बड़ी मल्टीस्क्रीन थिएटर ऑपरेटर पीवीआर (PVR)सिनेमाज फंड रेजिंग मोड में आ गई है। एक ऐसे समय में जब फिल्म और थिएटर से जुड़े कारोबार को Covid-19 के हमले का  सामान करना पड़ रहा है अजय बिजली (Ajay Bijli) के स्वामित्व वाली पीवाआर सिनेमाज ने राइट्स इश्यू के जरिए करीब 3000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है। मनीकंट्रोल को वह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है।


एक सूत्र ने मनीकंट्रोल को बताया है कि पीवीआर (PVR)सिनेमाज ने  एक्सिस कैपिटल (Axis Capital) को इस प्रस्तावित राइट्स इश्यू के लिए मर्चेंट बैंकर नियुक्त किया है। मनीकंट्रोल को एक दूसरे सूत्र के हवाले से जानकारी मिली है कि इस राइट्स इश्यू में पीवीआर सिनेमाज के प्रमोटरों के साथ ही इसमें निवेश करने वाले प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टर Warburg Pincus और Multiples Alternate Asset Management भी भाग ले सकते है।


मनीकंट्रोल को एक तीसरे सूत्र से जानकारी मिली है कि यह राइट इश्यू जुलाई में आ सकता है। पीवीआर के एकदम ताजे शेयर होल्डिंग पैटर्न पर नजर डालें तो इसमें प्रमोटरों की हिस्सेदारी 18.54 फीसदी है। Warburg Pincus की 12.74 फीसदी हिस्सेदारी है और  Multiples और उससे सम्बद्ध लोगों की 11.17 फीसदी हिस्सेदारी है।


मनीकंट्रोल को सूत्रों ने यह जानकारी गोपनीयता बनाए रखने की शर्त पर दी है। इस बारे में मनीकंट्रोल द्वारा भेजे गए ईमेल का पीवीआर लिमिडेट, एक्सिस कैपिटल और  Warburg Pincus ने यह कहते हुए जवाब दिया है कि वे इस खबर पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।


मनीकंट्रोल को Multiples से जवाब का इंतजार है। बता दें कि पीवीआर के पास पूरे भारत में करीब 176 प्रॉपर्टी के साथ 145 स्क्रीन है। कंपनी ने अक्टूबर 2019 में क्यूआईपी की प्रक्रिया पूरी की थी जिसके जरिए कंपनी ने करीब 500 करोड़ रुपये जुटाए थे।


बता दें कि शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां पैसे जुटाने के लिए राइट्स इश्यू लाती हैं। राइट्स इश्यू का मतलब है कि कंपनी अपने शेयरधारकों को अतिरिक्त शेयर खरीदने का मौका देती है। इसके लिए शर्तें कंपनी ही तय करती है। यह कंपनी तय करती है कि शेयर होल्डर कितने शेयर पर कितने अतिरिक्त शेयर खरीद सकते हैं। यदि कंपनी यह अनुपात 1:6 तय करती है तो इसका मतलब होगा कि शेयरधारक के पास हर छह शेयर पर 1 अतिरिक्त शेयर खरीदने का मौका मिलेगा। राइट्स इश्यू का निवेशकों को इसलिए इंतजार होता है क्योंकि वह इसके तहत डिस्काउंट रेट पर शेयर खरीद सकते हैं।


कंपनियां और अधिक पूंजी जुटाने के लिए राइट्स इश्यू लाती हैं। पूंजी बढ़ाने के अलावा कारोबार विस्तार या दूसरी कंपनियों को खरीदने के लिए भी राइट्स इश्यू का सहारा लिया जाता है। कई बार कंपनियां अपना ऋण कम करने के लिए भी राइट्स्स इश्यू लाती हैं।




 


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