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नासा की पहल, अब भारत की मशहूर धरोहरों का हिंदी में वीडियो

प्रकाशित Tue, 18, 2019 पर 15:17  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अगर आपको भारत के इतिहास, भूगोल या किसी चीज के बारे में जानकारी हासिल करनी है तो 100 फीसदी उम्मीद है कि वो अंग्रेजी भाषा में ही जानकारी मिलेगी। इसके ऊपर अमेरिका या लंदन में हिंदी में जानकारी मिलना तो शायद नामुमकिन है। लेकिन अब कुछ ऐसा हो रहा है कि सब कुछ मुमकिन हो रहा है। जी हां हिंदी में जानकारी मुमकिन है। और वो भी नासा के माध्यम से।


दरअसल अमेरिका में नासा ने वित्त पोषण वाले एक कार्यक्रम में भारत की मशहूर  धरोहरों और संस्थानों के बारे में एक वीडियो बनाया गया है। साथ ही वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी हिंदी में दी गई है। इस वीडियों में जयपुर में आमेर कक किला और हवा महल, यूनेस्को धरोहर स्थल कुतुब मीनार और उसमें स्थित जंग प्रतिरोधक लौह स्तंभ, चांद बावड़ी की सीढ़ियां और जयपुर फुट के मुख्यालय पर केंद्रित हैं। नासा द्वारा वित्त पोषित कार्यक्रम स्टारटॉक ने हिंदी, अरबी, चीनी और दुनिया की अन्य भाषाओं को पढ़ाना और सीखना अपने लिए प्राथमिकता का मुद्दा बना लिया है। इस परियोजना के निदेशक वेद चौधरी को 90,000 डॉलर का अनुदान मिला है।



इस कार्यक्रम का प्रबंधन मैरीलैंड विश्वविद्यालय का राष्ट्रीय विदेशी भाषा केंद्र कर रहा है।
इस प्रोग्राम प्रोजेक्ट हेड आलोक कुमार ने कहा कि, यह अनोखा अनुभव है। मुझे नहीं पता था कि इसमें इतना मजा आएगा।



कुमार स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू यॉर्क में फिजिक्स के प्रोफेसर हैं। उन्होंने प्राचीन हिंदू विज्ञान, मैथ मेडिसिन पर कई किताबें लिखी हैं। मैने कई अच्छे लोगों से मुलाकात की। जिसका मेरे जीवन पर असर पड़ा। उन्होंने कहा कि, मैरीलैंड विश्वविद्यालय ने बताया कि विज्ञान आधारित ये अनुसंधान उन स्थलों पर किए जा रहे है जिनका चयन कुमार ने किया है।


कुमार ने बताया कि 1799 में एक हिंदू वास्तुकार ने बिना किसी एयर कंडीशनिंग के मधुमक्खी के छत्ते जैसा हवा महल बनाया। इस महल की छोटी-छोटी खिड़कियों से अंदर जाती हवा प्रवाह की गति बढ़ाती है और प्राकृतिक ठंडापन देती है।


विश्वविद्यालय ने कहा कि दिल्ली में 402 ईसवीं में बना करीब 24 फुट लंबा लौहे का स्तंभ हिंदू लोहारों के कौशल का प्रमाण है जिन्होंने फास्फोरस से समृद्ध लोहे से इसे बनाया जिससे सदियों से मानसून और झुलसती गर्मी के बावजूद बिना जंग लगे यह जस का तस खड़ा है।