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कंज्यूमर अड्डाः जीएसटी की नई-पुरानी दरों के जानिए पेंच

GST यानी उलझन का पिटारा। इसे लागू हुए दो साल से ज्यादा हो गए हैं, मगर अब भी इसकी गुत्थी सुलझी नहीं है।
अपडेटेड May 10, 2019 पर 10:20  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

GST यानी उलझन का पिटारा। इसे लागू हुए दो साल से ज्यादा हो गए हैं, मगर अब भी इसकी गुत्थी सुलझी नहीं है। GST का दायरा तो बहुत बड़ा है, मगर हम बात करेंगे घर पर लगे रहे GST की। GST कॉउंसिल ने अंडर कंस्ट्रक्शन फ्लैट और अफोर्डेबल हाउसिंग पर दरों में 19 मार्च को कुछ बदलाव किए थे। तब से लोगों में कंफ्यूजन और बढ़ गया। अब इस पर नई सफाई आई है। इसमें साफ हो गया है कि GST की दरें चुनने का विकल्प सिर्फ बिल्डर के पास है।


एक ही प्रोजेक्ट के अलग-अलग टावर्स पर GST दर अलग-अलग हो सकती है। सरकार ने इस पर सफाई दे दी है। CBIC यानी केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने एक FAQ जारी किया है। इसमें आम तौर पर पूछे जाने वाले करीब-करीब सभी सवालों के जवाब हैं। GST कॉउंसिल के फैसले के मुताबिक 1 अप्रैल से पहले लॉन्च हुए प्रोजेक्ट में GST दर का विकल्प चुनने का अधिकार सिर्फ बिल्डर के पास है।


हालांकि बिल्डर को नई या पुरानी दर पर फैसला 10 मई तक ले लेना होगा। बिल्डर के पास ITC के साथ 12 फीसदी या बिना ITC के 5 फीसदी के विकल्प में से एक चुनना होगा। बिल्डर के पास ये अधिकार होने के चलते उसके किसी भी प्रोजेक्ट के अलग-अलग टावरों में अलग GST दर हो सकती है। हालांकि 1 अप्रैल के बाद लॉन्च प्रोजेक्ट पर अनिवार्य रूप से सिर्फ 5 फीसदी GST लगेगी। यहां बिल्डर के पास कोई विकल्प नहीं है। पहली अप्रैल के बाद लॉन्च अफोर्डेबल हाउसिंग यानी किफायती मकानों पर सिर्फ 1 फीसदी GST लगेगी।


CBIC ने कुछ और मामलों पर सफाई दी है। उसने साफ कर दिया है कि अगर कोई ग्राहक 1 अप्रैल से पहले बुक फ्लैट को कैंसिल कराता है तो बिल्डर को GST लौटानी होगी। यानी अगर आपने किसी फ्लैट के लिए पांच लाख रुपए बुकिंग अमाउंट दी है और बिल्डर ने उस पर 12 फीसदी यानी साठ हजार रुपए का GST जमा किया है और आप जब इस बुकिंग को कैंसिल कराते हैं तो बिल्डर को आपसे लिया साठ हजार रुपए GST भी वापस करना होगा। CBIC भी बिल्डर को बाद में GST रिमबर्स कर देगा।