हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के लिए आधार जरुरी नहीं: डॉ. वी के पॉल -
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हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के लिए आधार जरुरी नहीं: डॉ. वी के पॉल

प्रकाशित Fri, 09, 2018 पर 18:34  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार ने इस बार बजट में यह एलान तो कर दिया कि हर गरीब को 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में कराया जायेगा, लेकिन लोकसभा चुनाव से करीब 1 साल पहले किए गए इस एलान पर कई सवाल उठने शुरु हो गए है। सीएनबीसी-आवाज से बातचीत में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी के पॉल का कहना है कि गरीब को हाई स्टैंडर्ड हेल्थकेयर सुविधा मिलें यह हेल्थ प्रोफेशन में शामिल हर शख्स का सपना होता है।


फ्री हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम पर बात करते हुए डॉ. वी के पॉल का कहना है कि इस स्कीम के तहत पहले चरण में सोशियो इकोनॉमिक सर्वे में 7 कैटेगरी को शामिल किया जायेगा और उन किसी भी कैटेगरी में शामिल लोगों को स्कीम का फायदा मिलेगा। शहरी इलाकों में रोजगार का प्रकार आधार बनेगा। इसी आधार पर लाभार्थी का चयन होगा। उन्होंने आगे कहा कि स्कीम का फायदा उठाने के लिए सरकार स्कीम का प्रचार करेगी और स्कीम के लिए आधार जरूरी नहीं होगा।


फ्री हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम का अस्पताल को कैसे प्रमाण दिया जायेगा? इस सवाल पर डॉ. वी के पॉल का कहना है कि मौजूदा समय में इसकी डिटेल्स बन रही हैं। अस्पताल में आरोग्य सेवक होगा जो सरकार की तरफ से नियुक्त होगा। आरोग्य सेवक स्कीम के लिए लोगों की मदद करेगा। उन्होंने आगे बताया कि स्कीम में हॉस्पिटलाइजेशन कवर होगा। हालांकि स्कीम में ओपीडी सेवाएं शामिल नहीं होगी। इस स्कीम के तहत मेडिकल कॉलेज, सरकारी अस्पताल शामिल होंगे जबकि एम्स और जिला अस्पताल भी शामिल होंगे।


डॉ. वी के पॉल ने बताया कि इस स्कीम के तहत निजी अस्पतालों को भी जोड़ा जायेगा। हालांकि निजी अस्पतालों को शर्तों के साथ जोड़ा जाएगा। सरकारी, निजी अस्पतालों के लिए एक ही प्राइसिंग होगी। अस्पतालों के लिए स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस होंगी। मरीजों की शिकायतों का निपटारा होगा ताकि अस्पतालों की मनमानी नहीं चलेगी।


एनएबीएच मान्यता प्राप्त अस्पताल शामिल होंगे? इस सवाल पर डॉ. वी के पॉल ने कहा कि एनएबीएच की मान्यता अनिवार्य नहीं होगी। हालांकि कई पैमानों में से एक एनएबीएच मान्यता होगी। लेकिन इसके लिए भी जरूरत, सप्लाई, क्वालिटी और लागत का ध्यान रखा जाएगा।


स्कीम का गलत इस्तेमाल ना हो इसपर डॉ. वी के पॉल ने बताया कि फ्रॉड से बचने के लिए व्यवस्था बनानी होगी क्योंकि समाज में हर तरह के लोग हैं। फ्रॉड करने वाले अस्पतालों को इस स्कीम से बाहर होगें। फ्रॉड पकड़ने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करेंगे जिसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार हो रहा है। महंगी प्रक्रिया के लिए अस्पताल को पहले मंजूरी लेनी होगी। हालांकि इमरजेंसी में पहले से मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।