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GST बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं: FM

प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री ने कहा कि GST बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई भी प्रस्ताव उनके विचाराधीन नहीं है।
अपडेटेड Dec 15, 2019 पर 15:28  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कल यानी 13 दिसंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन, मुख्य आर्थिक सलाहकार के सुब्रमणियन और रेवेन्यू सेक्रेटरी अजय भूषण पाण्डेय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि पिछले दिनों सरकार ने जो आर्थिक सुधार किए हैं और सुस्ती के खिलाफ जो बड़े फैसले लिए हैं उनका असर दिख रहा है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि GST बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई भी प्रस्ताव उनके विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि GST की अभी कोई समीक्षा नहीं की जा रही है। ये अटकलें हमारे ऑफिस के अलावा हर जगह हैं। GST काउंसिल की बैठक अभी तक हुई नहीं है। ये अटकलें कहां से आ रही हैं, हमें नहीं पता। दरों की समीक्षा को लेकर अभी कोई चर्चा नहीं  हुई है।


वहीं रेवेन्यू सेक्रेटरी अजय भूषण पाण्डेय ने बताया कि छोटे और मझोले उद्योगों टैक्स रिफंड तेजी से करने के लिए स्पेशल ड्राइव चलाया गया और इसके नतीजे मिल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि MSMEs के लिए रिफंड जारी कर दिया गया है। अभी रिफंड के 74,000 मामले लंबित है। रिफंड के 10,841 करोड़ रुपये बकाया हैं। अभी तक 9,561 करोड़ रुपये के रिफंड को मंजूरी मिल चुकी है। बचा रिफंड जल्द पूरा किया जाएगा।


इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इकोनॉमी में सुधार के कई कदमों पर चर्चा हुई। साथ ही रोजगार के मोर्च पर भी पहली बार सरकार की तरफ से औपचारिक आंकड़े पेश किए गए। रोजगार पर नये सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2011-12 के मुकाबले 2017-18 में नौकरीपेशा लोगों की संख्या 5 फीसदी बढ़ी है। इस अवधि में कैजुअल वर्कर की संख्या में 5 फीसदी गिरावट आई है। वहीं, इस अवधि में एग्रीकल्चर सेक्टर में रोजगार 5 फीसदी गिरा है। इस अवधि में सर्विस सेक्टर में मिलने वाले रोजगार में 4 फीसदी और इंडस्ट्री की रोजगार दर में 1 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। संगठित क्षेत्र में रोजगार 2 फीसदी बढ़ा है जबकि असंगठित में 2 फीसदी घटा है। कितने नए रोजगार मिले और कितने बेरोजगार हुए इसका आंकड़ा नहीं दिया गया।


इस पूरे प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातों पर नजर डालें तो इसमें कहा गया कि इकोनॉमी में सुधार के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। अर्थव्यवस्था में बड़ी मात्रा में नकदी डाली गई है। अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए 25000 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गई है। ये मंजूरी महज 6 से 8 हफ्ते में दी गई। HDFC, SBI, LIC समेत 13 संस्थाओं ने इसमें दिलचस्पी ली है। 10,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावों पर काम भी शुरू हो गया है। लोन मेले में सरकारी बैंकों ने 4.9 लाख करोड़ रुपये के कर्ज बांटे हैं। NBFCs और HFCs को 4.47 लाख करोड़ रुपये दिए गए है। क्रेडिट गारंटी में 2 दिन में 7657 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। सरकारी कंपनियों ने विस्तार पर भी 3.38 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। PSUs ने विस्तार योजनाओं का 66 फीसदी खर्च भी किया है। सरकारी कंपनियों ने 61,000 करोड़ रुपये का बकाया चुकाया भी है। पहले 6 महीने में FDI के तौर पर 35 अरब डॉलर का निवेश आया है।


 


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