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संक्रमित लोगों की संख्या 10 लाख के करीब, 50 हजार से ज्यादा की मौत: John Hopkins University

93 दिन पहले सबसे पहले चीन में दस्तक देने के बाद करीब पूरा विश्व इस महामारी की चपेट में आ गया है।
अपडेटेड Apr 05, 2020 पर 08:03  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना वायरस महामारी के चपेट में लगभग 10 लाख लोग आ गये हैं और 50 हजार से अधिक लोगों की इस महामारी के कारण मौत हो गई है। आज से 93 दिन पहले सबसे पहले चीन में दस्तक देने के बाद करीब पूरा विश्व इस महामारी की चपेट में आ गया है। ये आंकड़े John Hopkins University द्वारा जारी किये गये हैं।


सीएनबीसी-टीवी 18 की खबर के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के चलते पूरे विश्व के देशों की सरकारें सख्त लॉकडाउन उपाय करने को मजबूर हो गईं और अरबों लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बाध्य कर दिया। वैज्ञानिक इस बीमारी की vaccine (टीका) खोजने में लगे हुए हैं जिसे सालों नहीं तो कुछ महीने जरूर लग सकते हैं। इस दौरान पूरे विश्व के स्वास्थ्य कर्मी इस संकट को कम करने के लिए दिन रात एक किये हुए हैं। 


इस बीच अधिकारियों का फोकस केवल इस महामारी से लड़ने तक ही सीमित नहीं है बल्कि वे लॉकडाउन के कारण गिरी हुई अर्थव्यवस्था को संभालने का उपाय करने पर नजर गड़ाये हुए हैं। कुछ एक्सपर्ट ने चेताया है कि ये महामारी और लॉकडाउन 1929 की महा मंदी के बाद यह अब तक के सबसे भीषण वित्तीय संकट का कारण बन सकते हैं।


इस बीच वायरस का एपिसेंटर उसके मूल स्थान चीन के वुहान से शिफ्ट होकर यूरोप और अब अमेरिका पहुंच चुका है जहां राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अगले 2 हफ्तें दर्दनाक होने की चेतावनी दी है।


इस महामारी ने वित्तीय बाजार को भी हिला कर रख दिया है जिसकी वजह से एक महीने के अंदर बाजार में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है जो कि 2008 के बाद अपने-आप में सबसे बड़ी गिरावट है हालांकि हाल ही में कुछ स्टॉक्स में रिकवरी भी देखने को मिली है। फिर भी वित्तीय एक्सपर्ट ने सावधान किया है कि आर्थिक रूप से बाजार के लिए चीजें और अधिक खराब हो सकती हैं।


भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों का लॉकडाउन लागू किया है और देशवासियों से जब तक अनिवार्य न हो बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी है। भारत में अब तक 2000 से ज्यादा संक्रमण और 50 से ज्यादा मौतें दर्ज हुई हैं। वहीं सरकार और केंद्रीय बैंक ने इस महामारी के झटके से इकोनॉमी को बचाने के लिए 5.4 लाख करोड़ रुपये के विभिन्न उपायों की घोषणा की है।


हालांकि वैज्ञानिक और अर्थशास्त्री मानते हैं कि इस महामारी से कितनी जन और आर्थिक हानि होगी इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस स्थिति की स्पष्टता इस महामारी के सुलझने पर निर्भर करती है और यह उस समय साफ होगी जब इसकी रोकथाम के लिए उठाये गये कदम इस संक्रमण को मंद कर दें।


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