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ONGC का कैश रिजर्व निचले स्तर पर, नए कुओं की खोज में बड़ी कटौती

पिछले छह साल के आंकड़ों से पता चलता है कि ONGC का कुओं की खोज पर खर्च होने वाली रकम आधी हो गई है। मार्च 2014 में 11,687 करोड़ रुपये के मुकाबले मार्च 2019 में घटकर 6,016 करोड़ रुपये रह गया है।
अपडेटेड Nov 22, 2019 पर 15:46  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आठ महारत्न कंपनियों की लिस्ट में शामिल Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) कंपनी इन दिनों कैश की किल्लत का सामना कर रही है। कंपनी देश में 60 फीसदी से अधिक पेट्रोलियम का प्रोडक्शन करती है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, 31 मार्च 2019 को खत्म हुए फिस्कल ईयर में कंपनी के पास केवल 504 करोड़ रुपये का रिकर्ड कैश लो रिजर्व और बैलेंस रह गया है। मार्च 2018 में यह गिरकर 1013 करोड़ पर पहुंच गया था। मार्च 2017 में कैश एंड बैलेंस रिजर्व 9,511 करोड़ रुपये था। इसके पहले मार्च 2016 में 9,957 करोड़ रुपये था। कुल मिलाकर 4 साल में कैश रिजर्व में 9007 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। ये गिरावट ऑयल मार्केटिंग कंपनी Hindustan Petroleum Corporation Ltd (HPCL) और Gujarat स्थित GSPC की हिस्सेदारी में शामिल दो डील की वजह से आई है। इधर सरकार ने सुनिश्चित किया है कि ONGC के पास बैंक क्रेडिट्स और कैपिटल मार्केट्स के जरिए पर्याप्त कैश है। 
 पिछले छह साल के आंकड़ों से पता चलता है कि ONGC का कुओं की खोज पर खर्च होने वाली रकम आधी हो गई है। मार्च 2014 में 11,687 करोड़ रुपये के मुकाबले मार्च 2019 में घटकर 6,016 करोड़ रुपये रह गया है।


हालांकि ONGC द्वारा कुओं के विकास पर किया गया खर्च पिछले छह सालों से स्थिर रहा है। फिस्कल ईयर 2013-14 में 8,518 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो कि पिछले फिस्कल ईयर में 9,362 करोड़ रुपये था। 


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