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फेस्टिव सीजन में करनी है ऑनलाइन शॉपिंग, जानिये कैसे बचें ऑनलाइन स्किमिंग और फ्रॉड से

हमारे बदलते पेमेंट मोड के चलते, हैकर्स भी आपकी जेब काटने के लिए नए पैंतरे अपनाते रहते हैं और इसमें online skimming लेटेस्ट है।
अपडेटेड Oct 10, 2019 पर 15:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

फेस्टिव सीजन का आगाज़ हो चुका है और ऐसे में आपने ऑनलाइन खरीदारी शुरू कर दी है, तो सावधान हो जाइए, हैकर्स की नजर आप पर है। बदलती technology  और हमारे बदलते पेमेंट मोड के चलते, हैकर्स भी आपकी जेब काटने के लिए नए पैंतरे अपनाते रहते हैं और इसमें online skimming लेटेस्ट है। योर मनी के इस खास शो में सीएनबीसी-आवाज़ आपको आज डिजिटल धोखाधडी से बचने और निपटने के तरिके बताएंगें। इसमें आपको सलाह देने के लिए सीएनबीसी-आवाज़ के साथ PCI Security Standards Council के एसोसिएट डायरेक्टर नितिन भटनागर जुड़ रहे हैं।


ऑनलाइन फ्रॉड के तरीके


डेबिट या क्रेडिट कार्ड स्किमिंग 


डेटा फिशिंग


ATM फ्रॉड


क्या है ऑनलाइन स्किमिंग ?


ई-कॉमर्स साइट पर जालसाजी का कोड डालना, JAVA स्क्रिप्ट को प्लांट करके फर्जीवाड़ा करना, ई-कॉमर्स वेबसाइट को हैक कर लेना और पेमेंट साइट से डाटा की चोरी करना ऑनलाइन स्किमिंग है।


कैसे होता है फर्जीवाड़ा ?


लॉग-इन में गड़बड़ी की कोशिश करके, फ्रॉड वाला कोड वेबसाइट में प्लांट करके, ई-कॉमर्स वेबसाइट में जालसाजी का कोड प्लांट करने से, थर्ड पार्टी मर्चेंट को हैक करके,
कस्टमर रेटिंग, लाइव चैटिंग और लुभावने ऐड से फ्रॉड किया जाता है।


कैसे करें फ्रॉड की पहचान ?


सिक्योरिटी सिस्टम को मजबूत बनाकर, कोड को मजबूत बनाएं ताकि आसानी से क्रैक ना हो, लॉग-इन ऑडिट रिपोर्ट तैयार कराना, कितनी बार और कहां लॉग-इन की समीक्षा करें। चेंज डिटेक्शन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने और प्रॉक्सी लॉग पर नजर रखना काफी कारगर होता है।


जालसाजी से कैसे बचें ?


गैरजरूरी पोस्ट, सर्विसेज को हटाएं, हमेशा सिक्योरिटी अपडेट जरूर करें, वायरस से बचने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट रखें, सभी गैर जरूरी एक्सेस को बंद करें, अथॉंटिकेशन सिस्टम को जरूर मजबूत बनाएं और मल्टी फैक्टर- अथॉन्टिकेशन MFA का इस्तेमाल करें।


फिजिकल स्किमिंग Vs ऑनलाइन स्किमिंग


फिजिकल स्किमिंग में पेमेंट टर्मिनल से जालसाजी होती है। मशीन में स्किमर डालकर डाटा चोरी किया जाता है। स्किमर से कार्ड की सभी डिटेल की जानकारी प्राप्त की जाती है। कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप से जानकारी हैक की जाती है।


ऑनलाइन स्किमिंग में फर्जी जावा स्क्रिप्ट से धांधली की जाती है। ई-कॉमर्स की वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है। जावा स्क्रिप्ट स्किमर की तरह काम करता है। पेमेंट पेज पर से जानकारी हैक की जाती है। नाम, पता, फोन, कार्ड नंबर, एक्सपाइरी डेट, CVV की हैकिंग की जाती है।


फिशिंग


इसमें फर्जी ई-मेल से गोपनीय जानकारी की चोरी की जाती है। पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर की जानकारी की चोरी की जाती है।


ATM फ्रॉड


इसमें कार्ड स्किमिंग, कार्ड ट्रैपिंग, ट्रांजैक्शन रिवर्सल फ्रॉड, कैश ट्रैपिंग, फिजिकल अटैक और लॉजिकल अटैक किया जाता है।


कार्ड स्किमिंग


कार्ड स्किमिंग ग्लोबली सबसे बड़ा खतरा बन गया है। इसमें स्किमिंग डिवाइस से डाटा चोरी किया जाता है। कार्ड होल्डर को नॉर्मल ट्रांजैक्शन का अनुभव होता है। इसमें
कार्ड होल्डर की तमाम जानकारियां लीक की जाती है।


कार्ड ट्रैपिंग


फिजिकल कार्ड की चोरी करना और इसमें आपका कार्ड मशीन में फंस जाएगा।


ट्रांजैक्शन रिवर्सल फ्रॉड


इस तरह के फ्रॉड में पैसे निकालते समय गड़बड़ी मैसेज दिये जाते हैं और ATM पैसे निकले नहीं पर खाते से कटौती हो जाती है।


कैश ट्रैपिंग


इसमें मशीन से निकले पैसों को ट्रैप किया जाता है। पैसे मशीन में अटकने से बाहर नहीं आते हैं।


फिजिकल अटैक


इसमें ATM से पैसे चोरी किये जाते हैं।


लॉजिकल अटैक


इसके तहत सॉफ्टवेयर से कैश निकासी कंट्रोल की जाती है। इसके अलावा कार्ड होल्डर के PIN डिटेल की चोरी भी की जाती है।


साइबर फ्रॉड से कैसे बचें?


ऑनलाइन पेमेंट के वक्त PCI-DSS सर्टिफिकेट देखें,
मोबाइल ऐप से पेमेंट के वक्त PAYSEC का लोगो देखें,
PAYSEC पर क्लिक करने से वैधता सर्टिफिकेट दिखेगा,
अनजान ई-मेल में आए लिंक, अटैचमेंट को ना खोलें,
सिस्टम, मोबाइल में एंटी वायरस, स्पैम फिल्टर, एंटी स्पायवेयर लगाएं,
अपने अकाउंट बैलेंस को नियमित रूप से देखते रहें,
अपने लॉग इन और सिक्योरिटी कोड किसी को ना बताएं,
बैंक या वॉलेट कंपनियां कभी आपसे सिक्योरिटी कोड, पासवर्ड नहीं मांगतीं,
ऑनलाइन बैंकिंग का यूजर ID, पासवर्ड पेचीदा बनाएं,
ऑनलाइन बैंकिंग करते वक्त ये जरूर देखें कि आखिरी बार कब लॉग इन किया था,
मोबाइल ऐप को ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें,
मोबाइल ऐप को समय-समय पर अपडेट करते रहें,
पब्लिक वाई-फाई पर मोबाइल वॉलेट, बैंकिंग ऐप ना खोलें।


डिजिटल फ्रॉड की शिकायत


धोखाधडी होने पर बैंक को इसकी जानकारी दें। कार्ड को तुरंत ब्लॉक करें।


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