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क्या हैं ऑप्शंस सेलिंग के फायदे!

प्रकाशित Wed, 12, 2018 पर 12:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हमारे साथ दिग्जज ऑप्शंस ट्रेडर पी आर सुंदर हैं। पी आर सुंदर ऑप्शंस राइटर के तौर पर जाने जाते हैं। सुंदर से आज के लिए बैंक निफ्टी की स्ट्रैटेजी तो समझेंगे ही, साथ ही ये भी पूछेंगे कि ऑप्शस सेलिंग के फायदे क्या हैं और इसमें कितना रिस्क है।


ऑप्शन बेचने की रणनीति पर पी आर सुंदर का कहना है कि टाइम वैल्यु यानी थीटा हमेशा सेलर के पक्ष में रहते हैं। वोलिटिलिटी यानी वेगा हमेशा सेलर के पक्ष में रहते हैं। लिहाजा एक्सपायरी के करीब ऑप्शन बेचने पर ज्यादा फायदा संभव है। यही नहीं बाजार दायरे में रहा तो पूरा प्रीमियम रखने का मौका मिलता है।


हालांकि पी आर सुंदर का कहना है कि बाजार में एकतरफा तेज चाल आई तो ऑप्शंस बेचने से घाटा संभव है। साथ ही ऑप्शंस बेचने में अनलिमिटेड लॉस संभव है। वहीं ऑप्शंस बेचने पर जो प्रीमियम मिला, वही अधिकतम मुनाफा होगा।


पी आर सुंदर के मुताबिक ऑप्शंस खरीदने पर जोखिम कम होता है जबकि मुनाफा अनलिमिटेड होता है। वहीं जो प्रीमियम दिया, वही अधिकतम घाटा होगा। ऑप्शंस खरीदने पर एक दिन में ही कई गुना मुनाफा संभव है। 10 रुपये का ऑप्शन कुछ घंटे में 500 रुपये भी हो सकता है, 31 मई को बैंक निफ्टी में ऐसा ही हुआ।


पी आर सुंदर का कहना है कि ऑप्शन खरीदना लॉटरी टिकट खरीदने जैसा है। टार्गेट आने पर भी घाटा हो सकता है और टार्गेट पर एक्सपायरी तो घाटा होगा। एक्सपायरी के करीब प्रीमियम तेजी से घटता है। टाइम वैल्यू यानी थीटा तेजी से प्रीमियम घटाता है और वॉलिटिलिटी यानी वेगा कम हुआ तो प्रीमियम घटेगा।