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ब्रिटेन की अदालत से पाकिस्तान को झटका, निजाम की संपत्ति पर भारत का दावा पक्का

आजादी के बाद हैदराबाद के 7वें निजाम की संपत्ति को लेकर ब्रिटेन की अदालत में चल रहे मुकदमे में भारत की जीत हुई है।
अपडेटेड Oct 03, 2019 पर 14:38  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आजादी के बाद हैदराबाद के 7वें निजाम की संपत्ति को लेकर ब्रिटेन की अदालत में चल रहे मुकदमे में भारत की जीत हुई है। ब्रिटेन की एक हाई कोर्ट ने बंटवारे के बाद से ही एक ब्रिटिश बैंक अकाउंट में पड़े निजाम की 3.5 करोड़ पाउंड यानी 306 करोड़ रुपये पर पाकिस्तान का दावा खारिज कर दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस संपत्ति पर भारत और निजाम के उत्तराधिकारियों का हक है। जस्टिस मार्कस स्मिथ ने 140 पेज के फैसले में 3.5 अरब पाउंड पर भारत और निजाम के अधिकार को स्वीकार किया।


इस संपत्ति का भारत सरकार और निजाम के उत्तराधिकारियों के बीच कैसे बंटवारा होगा, इसे लेकर दोनों पक्षों में एक गुप्त समझौता हो चुका है। अब यह संपत्ति भारत और 7वें निजाम ओसमान अली खान आसिफ के पोतों- आठवें निजाम (नाम मात्र के) और उनके भाई के बीच बांटा जाएगा। सारे विवाद की जड़ में 10 लाख पाउंड और एक गिन्नी की वह रकम थी जिसे 1948 में हैदराबाद के निजाम ने एक सरकारी बैंक खाते से दूसरे सरकारी बैंक खाते में ट्रांसफर किया था।


20 सितंबर 1948 को सातवें निजाम के वित्त मंत्री नवाब मोइन नवाज जंग ने इस रकम को लंदन स्थित एक दूसरे सरकारी बैंक के अकाउंट में ट्रांसफर किया था। जिस सरकारी बैंक अकाउंट में रकम ट्रांसफर हुई थी उस अकाउंट का संचालन हबीब इब्राहिम रहीमतुला कर रहे थे जो उस वक्त ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त भी थे। यह सब उस वक्त हो रहा था जब हैदराबाद की रियासत का भारत में विलय की प्रक्रिया चल रही थी।


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