Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

पेट्रोल-डीजल, रियल एस्टेट और शराब जीएसटी के दायरे से बाहर

प्रकाशित Tue, 18, 2019 पर 16:22  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पेट्रोलियम और रियल एस्टेट को लंबे समय से जीएसटी के दायरे में लाने की मांग चल रही थी। तेल और हवाई कंपनियों की मांग थी कि ईंधन को जीएसटी के आधीन किया जाए, लेकिन केंद्र सरकार ने कंपनियों की मांग को दरकिनार कर दिया। सरकार का तर्क है कि इससे राज्यों सरकारों की कमाई में काफी असर पड़ेगा।


दरअसल, तेल, रियल एस्टेट और शराब से राज्य सरकारों की तगड़ी कमाई होती है। ऐसे में राज्य सरकारें कभी नहीं चाहेंगी, कि उनके हिस्से की कमाई चली जाए। अगर इन्हें जीएसटी के दायरे में लाया गया तो राज्य सरकारों को भारी भरकम आर्थिक नुकसान होगा।


 फिलहाल पेट्रोलियम उत्पादों जैसे पेट्रोल, डीजल, हवाई ईँधन के अलावा मकान खरीद पर स्टैम्प ड्यूटी, और शराब पर एक्साइज ड्यूटी लगाने का अधिकार राज्य सरकार के पास है।


 


अगर पेट्रोलियम उत्पादों में जीएसटी लगाया जाता है तो उन पर 28 फीसदी टैक्स के बाद सेस (उपकर) लगाया जाएगा। जिसका फायदा तेल कंपनियों को होगा। ग्राहकों के लिए तेल अंतर में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।


 


जीएसटी लागू होते ही राज्य सरकारों के पास गिने चुने आइटम बचे हैं। जिसमें टैक्स लगाया जा सकता हो। ज्यादातर वस्तुओं में कितना टैक्स लगेगा, इसका फैसला वित्त मंत्री की अध्यक्षता में बैठक में किया जाता है।


 


इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि, दुनिया में कहीं भी डीजल और पेट्रोल जीएसटी के दायरे में नहीं हैं। इसलिए भारत में जीएसटी और वैट दोनों टैक्स लागू होंगे।