नीरव मोदी भागा, फैल सकती है पीएनबी घोटाले की आग -
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नीरव मोदी भागा, फैल सकती है पीएनबी घोटाले की आग

प्रकाशित Thu, 15, 2018 पर 12:46  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पीएनबी फ्रॉड में फंसे नीरव मोदी देश छोड़ भाग चुके हैं। खबरें  हैं कि नीरव मोदी भारत छोड़ स्विट्जरलैंड में जा छिपे हैं। इधर इस मामले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी के खिलाफ जाचं एजेंसियों ने एक्शन तेज कर दिया है। ईडी ने नीरव मोदी के देशभर में फैले करीब 12 ठिकानों पर छापे मारे है। आज मुंबई के कुर्ला के घर, काला घोड़ा के ज्वेलरी शोरूम, बांद्रा के 3 जगहों के अलावा सूरत के तीन ठिकानों, दिल्ली के चाणक्यपुरी और डिफेंस कॉलोनी के शोरूम पर भी छापा पड़ा। नीरव मोदी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया है।


आपको बता दें कि नीरव मोदी की पत्नी ने 6 जनवरी 2018 को देश छोड़ा दिया था। इसके साथ नीरव के भाई निशल मोदी ने 1 जनवरी 2018 को और मेहुल चोकसी ने 4 जनवरी 2018 देश छोड़ दिया था। वहीं सीबीआई ने 31 जनवरी 2018 को आरोपियों के खिलाफ लुक ऑउट नोटिस जारी किया था।


इस बीच पीएनबी में हुए करीब 11 हजार 500 करोड़ के फर्जी लेनदेन के मामले में नया खुलासा हुआ है। बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक कुछ दूसरे बैंकों पर भी इस घोटाले की आंच आ सकती है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक पीएनबी घोटाले में 6 दूसरे बैंक भी शामिल हैं। इन 6 बैंकों ने पीएनबी के लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग के आधार पर कर्ज दिया। नीरव मोदी, गीतांजलि जेम्स को पीएनबी ने लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग जारी किया था जिसके आधार पर यूनियन बैंक, एक्सिस बैंक, एसबीआई की विदेशी ब्रांच ने कर्ज दिया। इस तरह कर्ज देनें वालों में केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक भी शामिल हैं।


बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक पीएनबी के लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर यूनियन बैंक ने 2300 करोड़ रुपये का, इलाहाबाद बैंक की विदेशी शाखा ने 2000 करोड़ रुपये का, एसबीआई की विदेशी शाखा ने 960 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। पीएनबी के विदेशी करेंसी (नॉस्ट्रो) खाते में ये पैसे भेजे गए थे। बैंकों ने पीएनबी से देनदारी की मांग की। एक्सिस बैंक ने 2000 रुपये दिए बाद में पूरा एक्सपोजर बेच दिया।


नीरव मोदी ने घोटाला कैसे किया? आइये जानते हैं। पीएनबी मुंबई ब्रांच के अधिकारियों की नीरव मोदी से मिलीभगत थी। पीएनबी के जूनियर अधिकारी ने गलत तरीके से नीरव मोदी की कंपनियों के नाम लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग जारी किया। फिर पीएनबी ने लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग के आधार पर बैंक गारंटी जारी किया। लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग के आधार पर बैंकों के विदेशी शाखाओं से कर्ज लिया गया। सारे ट्रांजैक्शन सेंट्रलाइज्ड बैंकिंग सिस्टम के जरिए नहीं किए गए। आरोपी अधिकारी के रिटायर होने पर ये फ्रॉड पकड़ा गया। नीरव मोदी की कंपनी के दोबारा लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग लेने की कोशिश में मामला सामने आया।


उधर आज जांच एजेंसियां भी पीएनबी के हेडक्वार्टर पहुंचीं और मैनेजमेंट से बातचीत की। वित्त मंत्रालय ने ईडी से मामले पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।


इस बीच पीएनबी के मैनेजमेंट ने कहा है कि मामले में दोषी अधिकारियों पर एक्शन लिया गया है। बैंक के एमडी और सीईओ सुनील मेहता ने कहा है कि मसले को लेकर सभी बैंकों और सेबी को जानकारी दी गई है। साथ ही मैनेजमेंट ने ये भरोसा दिया है कि बैंक हर मायने से इससे निपटने की क्षमता रखता है।


उन्होंने आगे कहा कि फ्रॉड करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी सेबी को भी इस बारे में पूरी जानकारी दी गई है। पीएनबी क्लीन बैंकिंग के लिए प्रतिबद्ध है। पूरे सिस्टम को ठीक करने का काम जारी है। समस्या से निपटने के लिए बैंक सक्षम है। बैंकों के हित की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हैं। इसके लिए जांच एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।


सुनील मेहता ने ये भी कहा है कि नीरव मोदी ने फिलहाल रिपेमेंट का कोई प्रस्ताव नहीं रखा है। जरूरत पड़ने पर फॉरेंसिक ऑडिट कराई जाएगी। इस मामले में आरबीआई की ओर से अभी कोई निर्देश नहीं मिला है। रिकवरी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जिसके तहत नीरव मोदी को रीपेमेंट का प्लान सौंपने को कहा गया है।


इस घपले को लेकर सियासी ब्लेमगेम भी शुरू हो गया है। बीजेपी ने जहां कांग्रेस पर आरोप लगाया है तो वहीं कांग्रेस ने कहा है कि बीजेपी को सच का सामना करना चाहिए और ठोस कारर्वाई करनी चाहिए। कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली की चुप्पी पर भी निशाना साधा है। 


उधर सेबी के पूर्व ईडी जेएन गुप्ता का कहना है कि इस मामले में पीएनबी के एक दो मैनेजर नहीं बल्कि दूसरे बैंकों के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।


आईकैन इन्वेस्टमेंट के अनिल सिंघवी ने पीएनबी मामले में बैंक के सिस्टम और सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बैंक ने नीरव के मामले को अनदेखा किया। नीरव मोदी के कार्यक्रम में बैंक वाले जाते थे। इस मामले में पीएनबी का रवैया गैरजिम्मेदाराना रहा है। ऐसे बैंकों को रिकैपिटलाइजेशन का पैसा नहीं देना चाहिए। बैंको को दिया गया पैसा करदाताओं का है, सरकार का नहीं।