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प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत की तैयारी, मजदूर से जुड़े कानून में बदलाव संभव

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार प्रवासी मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की तैयारी में है।
अपडेटेड May 29, 2020 पर 09:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

 प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर लगातार आलोचना झेल रही सरकार जल्द कानून में बदलाव करने वाली है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार प्रवासी मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की तैयारी में है। इसके लिए प्रवासी मजदूर से जुड़े कानून में बदलाव संभव है। प्रवासी मजदूर के लिए पेंशन, हेल्थ इंश्योरेंस जैसी सुविधा का प्रस्ताव है। एक तय रकम की सैलेरी फिक्स हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक नए प्रावधानों के तहत प्रवासी मजदूरों को साल में एकबार अपने राज्य जाने का खर्च मिलेगा। इसके लिए Interstate Migrant Workmen Act 1979 में संशोधन होगा। ये प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में  भेजा जा सकता है। इससे सभी तरह के प्रवासी मजदूरों को होगा फायदा।  हर वर्कर को अलग यूनिक ID कार्ड दिया जाएगा। इसके बाद ऐसे कामगारों को हेल्थ इंश्योरेंस और पेंशन जैसी सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी।


श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि कानूनी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है और बीजू जनता दल सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति द्वारा प्रस्तावित संहिता में कुछ प्रावधानों को मंजूरी दे दी गई है। जिसमें आगे बदलाव किया जा सकता है।


उधर कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच मजदूरों और लोगों की समस्याओं पर कांग्रेस ने अपने स्पीक-अप इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की। कांग्रेस के मुताबिक वो ज़रूरतमंद और परेशान लोगों की आवाज उठाएगी। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गरीब परिवारों के लिए हर महीने साढ़े सात हजार रुपये देने की मांग की। सोनिया ने केंद्र सरकार से मनरेगा में 200 दिन के लिए रोजगार देने की भी मांग की है।


स्पीक अप इंडिया की शुरुआत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी नू केंद्र सरकार के संवेदनहीन बताया है। सोनिया नू कहा कि देश भर में मजदूरों और गरीबों की सिसकियां सबने सुनी, लेकिन केंद्र सरकार नहीं सुन पाई। सोनिया ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार सभी के लिए आर्थिक राहत के लिए खजाने का ताला खोलें।




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