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रघुराम राजन ने सरकार को चेताया, कहा- संकट में है रियल स्टेट

राजन ने कहा कि भारत में रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज संकट में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 47 अरब डॉलर के प्रॉजेक्ट्स फंसे हुए हैं।
अपडेटेड Dec 09, 2019 पर 09:26  |  स्रोत : Moneycontrol.com

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत की अर्थव्वस्था पर फिर से निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत की रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन इंडस्ट्रीज को लोन देने Non Banking Financial Company (NBFC) की एसेट की क्वालिटी की रिव्यू कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर में आर्थिक सुस्ती के कारण काफी दबाव है। अगर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाए, तो देश को गंभीर अंजाम भुगतना पड़ सकता है।
राजन ने इंडिया टुडे में एक लेख में लिखा है। इस लेख में उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था से संबंधित कई बातें लिखी हैं। उन्होंने लिखा है कि ग्रामीण इलाके में स्थित बेहद खराब है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास दर दूसरी तिमाही में घटकर 4.5 फीसदी पहुंच चुकी है। बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। NBFC लोन बांटने की स्थति में नहीं है। बैड लोन बढ़ता जा रहा है। जिसकी वजह लोन बांटने की प्रक्रिया सुस्त पड़ गई है।


उन्होंने RBI को सलाह देते हुए कहा है कि NBFCs का असेट क्वालिटी रिव्यू करना चाहिए। गुरुवार को गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि RBI टॉप-50 शैडो बैंकिंग पर नजर रखता है। इन पचास NBFCs के पास शैडो बैंकिंग का करीब 75 फीसदी असेट्स हैं। ऐसे में कहां कमी है और कहां दबाव है, इसका अंदाजा रिजर्व बैंक को है।


भारत में रियल एस्टेट सेक्टर में करीब 3.3 लाख करोड़ रुपए के प्रॉजेक्ट अटके हुए हैं। वहीं 4.65 लाख यूनिट घर निर्माण की प्रक्रिया बीच में अटकी पड़ी है। ऐसे हालात में रघुराम राजन ने भारत के रियल एस्टेट को टाइम बम करार दिया, जिसके कभी भी फटने की आशंका जाहिर की।


रघुराम राजन ने कहा है कि देश में सुस्ती के संकेत का कारण प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की वजह से है। उनके मंत्रियों के पास कोई शक्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि सुधारों के लिए फैसले के साथ-साथ विचार और योजना पर निर्णय भी पीएम नरेंद्र मोदी के कुछ नजदीकी लोग और PMO के लोग ही लेते हैं, जो आर्थिक सुधारों के मामलों में काम नहीं करते हैं।


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