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आमदनी से ज्यादा रेलवे का खर्चा

प्रकाशित Sat, 05, 2019 पर 15:29  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया, फिलहाल भारतीय रेल का कुछ यही हाल है। सूत्रों के मुताबिक रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 112 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया है यानी 100 रुपये कमाने के लिए रेलवे 112 रुपये खर्च कर रहा है। आमदनी बढ़ाने के लिए रेलवे फ्लेक्सी फेयर से लेकर डायनामिक प्राइसिंग तक का फार्मूला अपना चुका है, यहां तक कि समय-समय पर अलग-अलग कमोडिटीज के मालभाड़े में भी इजाफा किया गया। बावजूद इसके भारतीय रेल घाटे से उबर नहीं पाई। घटती कमाई का नतीजा ये है कि रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 112 फीसदी के स्तर पार पहुंच गया है।


इसकी बड़ी वजह है यात्री किराए से हो रहा घाटा। ताजा आंकड़ों के मुताबिक नवंबर तक रेलवे को कुल 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये की कमाई हुई जबकि लक्ष्य 1 लाख 22 हजार करोड़ रुपये का था। यानी रेलवे को करीब 7840 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। रेल मंत्रालय के मुताबिक बढ़ते खर्च की मुख्य वजह माल ढुलाई में कमी, यात्री किराए से कम आमदनी और 7वें पे-कमीशन से रेलवे पर पड़ा अतिरिक्त 22 हज़ार करोड़ रुपये का बोझ है।


नवंबर के आखिर तक यात्री किराया में रेलवे को करीब 700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं मालढुलाई जो रेलवे की आमदनी का सबसे बड़ा जरिया है वहां भी रेलवे की परफॉरमेंस उम्मीद से कम रही। हालांकि रेलवे को उम्मीद है कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान होने वाली बुकिंग से दबाव कम होगा लेकिन जानकारों का मानना है कि मार्च तक यही ट्रेंड देखने को मिलेगा, इसलिए जल्द राहत के आसार कम है। ऐसे में रेलवे को अपनी नॉन फेयर रेवेन्यू पर फोकस बढ़ाने की ज़रूरत है।