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रेल पूछताछ नंबर बना सरकारी वसूली का जरिया

क्या आपको पता है कि ये नंबर देश के रेल यात्रियों को हर साल करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा है।
अपडेटेड Dec 15, 2016 पर 12:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अक्सर ट्रेनों के आने-जाने की जानकारी हासिल करने के लिए आप रेल पूछताछ नम्बर 139 की मदद लेते होंगे। लेकिन क्या आपको पता है कि ये नंबर देश के रेल यात्रियों को हर साल करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा है। आपकी मर्जी के बिना आपके ही पैसों से 139 पर आपको सरकारी विज्ञापन सुनना पड़ता है और ये सरकारी विज्ञापन मुफ्त नहीं हैं। आप जितनी बार 139 पर कॉल करेंगे उतनी बार आपको ये विज्ञापन सुनाई देंगे और इसकी कीमत आपसे ली जाएगी।


आंकड़ों के मुताबिक देश भर में रोजाना 3.5 लाख कॉल्स रेलवे के पूछताछ नम्बर पर किए जाते हैं यानी महीने भर में इस नम्बर पर 1 करोड़ 5 लाख कॉल्स किए जाते हैं। मेट्रो शहरों से इस नंबर पर कॉल करने पर 1 रुपये 20 पैसे प्रति मिनट और नॉन मेट्रो शहरों से कॉल करने पर 2 रुपये प्रति मिनट लगते हैं। इस हिसाब से हर महीने करोड़ों रुपये का चूना रेल यात्रियों को लगता है इस बारे में जब हमने 139 का संचालन कर रही रेलवे की कंपनी आईआरसीटीसी से बात की तो हमें पता चला कि इन्कॉवयरी कॉल के दौरान 12-15 सैकेंड के सरकारी विज्ञापन सुनाने का पैसा भारत बीपीओ सर्विसेज नाम की कंपनी को जाता है। भारत बीपीओ वो कंपनी है जिसे आईआरसीटीसी की तरफ से 139 इंक्वायरी सिस्टम और ऑनलाइन टिकटिंग का ठेका दिया गया है।


हालांकि आईआरसीटीसी ने हमें इस बात का जवाब नहीं दिया कि सरकारी विज्ञापन का खर्च फोन करने वालों से क्यों लिया जाता है? साथ ही इस बात का भी कोई जवाब नहीं है कि क्या फोन करने वालों को इस बात की जानकारी दी जाती है कि वो जो विज्ञापन सुन रहे हैं, उसका खर्च उन्हें ही उठाना है? साफ है कि रेलवे चुपचाप अपने मुसाफिरों से ये पैसे वसूल रहा है और यात्रियों को इसकी ख़बर तक नहीं।