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RBI ने लगातार चौथी बार घटाई दरें, रेपो रेट 9 साल के निचले स्तर पर

आरबीआई ने रेपो रेट 0.35 फीसदी घटाकर 5.40 फीसदी कर दिया है
अपडेटेड Aug 07, 2019 पर 11:48  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रिजर्व बैंक ने अपना काम कर दिया है। उसने लगातार चौथी बार ब्याज दरों में कटौती की है। आरबीआई ने ब्याज दरों में 0.35 फीसदी कटौती की है। अब रेपो रेट 0.35 फीसदी घटकर 5.40 फीसदी हो गया है, जबकि रिवर्स रेपो 0.35 फीसदी घटकर 5.15 फीसदी पर आ गया है। रिजर्व बैंक ने मौजूदा कारोबारी साल के लिए GDP ग्रोथ अनुमान में भी हल्की कटौती की है। GDP ग्रोथ अनुमान 7 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है। शक्तिकांता दास ने कहा MPC ने सभी बातों को ध्यान में रखकर 0.35 फीसदी दर घटाई है। शक्तिकांता दास ने ये भी साफ कर दिया है कि आगे दरों में कटौती का फैसला आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर होगा।


MPC के 6 सदस्यों में से 4 MPC सदस्य 0.35 फीसदी कटौती के पक्ष में थे। वहीं 2 सदस्य 0.25 फीसदी की कटौती चाहते थे। MPC का पॉलिसी पर ACCOMMODATIVE रुख बरकरार रखा है। MPC ने ब्याज दरों पर नरम रुख कायम रखा है।


आरबीआई ने वित्त वर्ष 2020 के लिए GDP ग्रोथ लक्ष्य 7 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी किया है।


आरबीआई का कहना है कि वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं इस अवधि में खुदरा महंगाई 3.6 फीसदी रह सकती है जबकि अक्टूबर-मार्च में खुदरा महंगाई के 3.5 से 3.7 फीसदी रहने का अनुमान है।


आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही में GDP ग्रोथ 7.3 से 7.5 फीसदी रह सकती है। वहीं इसी वित्त वर्ष की पहली छमाही में इसके 5.8 से 6.6 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है। ट्रेड वॉर और ग्लोबल सुस्ती का असर भारतीय इकोनॉमी पर देखने को मिल रहा है।


आरबीआई ने कहा है कि NBFCs के लिए एक्सपोजर 15 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी किया गया है। देश में निजी निवेश और मांग को बढ़ाना आरबीआई की प्राथमिकता है।  निवेश बढ़ाने के लिए MSMEs के लिए 20 लाख रुपये तक के कर्ज को प्राथमिकता के आधार पर देखा जायेगा।


आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास ने कहा कि दुनिया भर में महंगाई दर नियंत्रण में है। जिसको देखते हुए दुनिया भर के सेंट्रल बैंक दरें घटा रहे है। उन्होंने आगे कहा कि राजनैतिक गतिविधियों से बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।


इकोनॉमी पर बोलते हुए शक्तिकांता दास ने कहा कि खरीफ फसलों की बुआई में 6.6 फीसदी की कमी दिखी है। कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी सुस्ती का माहौल देखने को मिल रहा है। हालांकि खाद्य और तेल के अलावा महंगाई काबू में है जिसको देखते हुए वित्त वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 3.1 फीसदी पर कायम है।