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आरबीआई ने की दरों में कटौती, क्या सिर्फ सस्ते कर्ज से बढ़ेगी ग्रोथ की रफ्तार !

RBI गवर्नर शक्तिकांता दास ने एक बार फिर सस्ते कर्ज का तोहफा दिया है। RBI ने लगातार पांचवी बार ब्याज दरों में कटौती की है।
अपडेटेड Oct 07, 2019 पर 17:11  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

RBI गवर्नर शक्तिकांता दास ने एक बार फिर सस्ते कर्ज का तोहफा दिया है। RBI ने लगातार पांचवी बार ब्याज दरों में कटौती की है। हालांकि बाजार को 0.25 प्रतिशत की कटौती उम्मीद से थोड़ी कम जरूर लग रही है। लेकिन पॉलिसी से RBI ने ये साफ कर दिया है कि वो हर कीमत पर ग्रोथ चाहता है। साथ ही नकदी की हालत सुधारने के लिए माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की कर्ज बांटने की सीमा में भी बढ़ोतरी की गई है। मकसद है ग्रोथ और सिर्फ ग्रोथ पर फोकस रखना।


लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ कर्ज सस्ता करने से ही ग्रोथ की रफ्तार बढ़ जाएगी। क्या MSMEs के लिए नकदी की किल्लत दूर होगी और सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या बैंक ग्राहकों को कटौती का पूरा फायदा पहुंचाएंगे। आज हम आपने खास शो में इन्हीं सवालों पर फोकस करेंगे। हमारे साथ बातचीत के लिए Kotak Mahindra Bank की उपासना भारद्वाज, Thermax Limited के एमएस उन्नीकृष्णन और HDFC Securities के वीके शर्मा सीएनबीसी-आवाज़ के साथ जुड़ गए हैं।


दर कटौती की बड़ी बातें


RBI ने लगातार पांचवी बार दरों में कटौती की है। RBI ने ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती की है। इस कटौती से रेपो रेट 0.25 प्रतिशत से घटकर 5.15 प्रतिशत हो गया है। दूसरी तरफ रिवर्स रेपो रेट 0.25 प्रतिशत घटकर 4.90 प्रतिशत हो गया। इतना ही नहीं आरबीआई ने FY20 में GDP ग्रोथ अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.1 प्रतिशत किया है, इससे FY20 में आगे महंगाई 4 प्रतिशत से कम संभव हो सकेगी।


उधर NBFC-MFIS के लिए उधारी सीमा बढ़ाकर 1.25 लाख की गई। कमजोर मांग के कारण दूसरी तिमाही में GDP पर असर हुआ है। ग्रामीण, शहरी मांग में आगे भी धीमापन संभव है। RBI ने इस साल अब तक 1.35 प्रतिशत रेपो रेट घटाया है।


माइक्रोफाइनेंस को बड़ी राहत


दूसरी तरफ ग्रोथ बढ़ाने के लिए RBI ने माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को भी बड़ी राहत दी है। RBI ने NBFCs और MFIs के लिए उधारी सीमा में बढ़ोतरी कर दी है। उधारी सीमा में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए बढ़ोतरी की गई है।


RBI ने ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों में कर्ज देने की सीमा बढ़ाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 1.25 लाख की गई। वहीं शहरों के लिए सीमा 1.6 लाख से बढ़ाकर 2 लाख की गई है। इससे पहले 2015 में आखिरी बार सीमा बढ़ाई गई थी। अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए भी ग्रामीण भाग पर फोकस किया जा रहा है।


आरबीआई द्वारा दर कटौती पर विचार रखते हुए HDFC Securities के वीके शर्मा ने कहा कि आरबीआई की रेट में कटौती और आगे जरूरत के मुताबिक और कटौती करने का एलान अच्छा है लेकिन 0.5 फीसदी तक की कटौती की गुंजाइश थी। वित्तीय घाटे पर ज्यादा ध्यान न देकर और साहसिक कदम उठाने की जरूरत है जो आरबीआई को करना चाहिए। आरबीआई का आज का कदम बुखार ज्यादा और पट्टी कम जैसा ही है।


Kotak Mahindra Bank की उपासना भारद्वाज का कहना है कि बीते 6 महीने में आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती का असर नए लोन धारकों पर देखा गया है। पिछले 2 महीने में MCLR 20-22 बेसिस प्वाइंट से नीचे गिरा है लेकिन जो आउटस्टैंटिंग लोन पर रेट कटौती का असर नहीं दिख रहा है। संभावनाएं है कि आगे जाकर रेपो रेट में कटौती का पूरा फायदा देखने को मिलेगा।


Thermax Limited के MS.Unnikrishnan का कहना है कि कंपनियों को दरों में कटौती का फायदा नए कर्ज में ही मिलेगा। पुराने कर्ज को इससे फायदा नहीं होगा। इस ग्राउंड लेवल पर इस कटौती का असर दिखने में कम से दो तिमाही तो लगेगी।


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