Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

आरबीआई ने दरें 0.25% घटाईं, पॉलिसी के रुख में नरमी आई

प्रकाशित Thu, 07, 2019 पर 11:57  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांता दास ने अपनी पहली पॉलिसी में ही सुपर गवर्नर वाला काम कर दिखाया। उन्होंने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती कर दी है जिसके बाद रेपो रेट 6.25 फीसदी हो गया है। दरें घटने का सीधा मतलब ये है कि बैंकों को आरबीआई से सस्ता कर्ज मिलेगा यानि आम आदमी के लिए भी कर्ज सस्ता हो जाएगा। शक्तिकांता दास ने दरें घटाने के साथ-साथ पॉलिसी का रुख भी न्यूट्रल कर दिया है और आगे के लिए भी अच्छे संकेत दिए हैं।


आरबीआई ने महंगाई पर अनुमान घटा दिया है। गवर्नर शक्तिकांता दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में महंगाई के 4 फीसदी से नीचे रहने का अनुमान है। ऐसे में आगे और ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश रहेगी।


आरबीआई ने कहा है कि बैंकों को जमा दरें संतुलित रखने की जरूरत है। एनबीएफसी में बैंकों के एक्सपोजर नियम बदले गए हैं। फरवरी अंत तक एनबीएफसी के लिए नए नियम जारी होंगे।


बिना गिरवी के कृषि कर्ज सीमा की 60000 रुपये बढ़ा दी गई है। किसान अब बिना गिरवी के 1.60 लाख रुपये तक का कर्ज ले सकते हैं। कंपनियां भी ईसीबी से बैंकों का कर्ज चुका सकती हैं।


आरबीआई का वित्त वर्ष 2020 में जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है। अक्टूबर-दिसंबर में 7.5 फीसदी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान है। वहीं, अप्रैल-सितंबर में 7.2-7.4 फीसदी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान है। आरबीआई का अनुमान है कि अप्रैल-सितंबर में सीपीआई 3.2-3.4 फीसदी के बीच रहेगी जबकि जनवरी-मार्च की अवधि में रिटेल महंगाई 2.8 फीसदी रह सकती है।


आरबीआई गवर्नर ने आगे कहा कि करेंसी मार्केट के लिए टास्क फोर्स गठित किया जाएगा। लिक्विडिटी की स्थिति पर नजर बनी हुई है । ये सुनिश्चित किया जाएगा कि लिक्विडिटी की कमी न हो। पेमेंट गेटवे के लिए भी अलग रेगुलेटर का प्रस्ताव है।


वित्त वर्ष 2019 में कृषि उत्पादन में सुस्ती का अनुमान है। अब तक रबी फसलों की बुआई पिछले साल से कम है। तीसरी तिमाही में निवेश की रफ्तार धीमी हुई है। कच्चे तेल में भी नरमी आई है। ग्लोबल फाइनेशियल मार्केट में स्थिरता आ रही है।