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RBI ने रेपो रेट 0.25% घटाया, लगातार पांचवीं कटौती, ग्रोथ रेट अनुमान घटाकर 6.1% किया

अगस्त में खुदरा महंगाई दर मामूली बढ़ोत्तरी के साथ 3.21 फीसदी रही लेकिन यह RBI के 4 फीसदी टारगेट के भीतर है
अपडेटेड Oct 06, 2019 पर 08:53  |  स्रोत : Moneycontrol.com

RBI monetary policy। रिजर्व बैंक ने इस साल लगातार पांचवीं बार रेपो रेट घटाने का फैसला किया है। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने आज की बैठक में रेपो रेट में 0.25 फीसदी कटौती की है। इसी के साथ रेपो रेट 5.35 फीसदी से घटकर 5.15 फीसदी पर आ गया है।यह मार्च 2010 के बाद सबसे निचला स्तर है। कुल मिलाकर RBI इस साल रेपो रेट में 1.35 फीसदी की कटौती कर चुका है। रिवर्स रेपो रेट 4.90 फीसदी है।


RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने फिस्कल ईयर 2019-20 के लिए GDP आउटलुक को 6.9 फीसदी से घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया है। इसके साथ ही फिस्कल ईयर 2020-21 के GDP आउटलुक को रिवाइज करके  6.6-7.2 फीसदी किया है।


MPC ने पॉलिसी रेट में नरमी का नजरिया बरकरार रखने का फैसला किया है। कमिटी का मानना है कि ग्रोथ रिवाइव करने के लिए रेपो रेट में कटौती जरूरी है क्योंकि महंगाई भी अभी 4 फीसदी के टारगेट में हैं।


आरबीआई ने डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। आरबीआई की ओर से कहा गया है कि NEFT यानी नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर का वर्किंग डेज में 24 घंटे इस्तेमाल हो सकेगा। गौरतलब है कि NEFT देश में बैंकों के माध्यम से फंड का लेन-देन करने का आसान तरीका है। NEFT के जरिए एक बार में 50000 रुपये तक का लेन-देन किया जा सकता है। खास मामलों में ये सीमा बढ़ाई भी जा सकती है। अभी तक NEFT में वर्किंग डेज में सुबह 8 बजे से 6:30 बजे शाम तक ही कामकाज होता है।


आरबीआई ने माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को भी बड़ी राहत दी है। RBI ने गांवों के लिए उधारी सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी है। शहरों में माइक्रोफाइनेंस कंपनियां 2 लाख रुपये तक कर्ज दे पाएंगी, ये सीमा पहले 1.6 लाख रुपये थी। 2015 में आखिरी बार ये सीमा बढ़ाई गई थी। इस खबर के बाद उज्जीवन, इक्विटास और स्पंदन स्फूर्ति के शेयर ने जोरदार रफ्तार भरी है। सरकार अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस कर रही है।


MPC के सभी सदस्यों ने रेपो रेट में कटौती के पक्ष में वोट किया था। चेटन घाटे, पमी दुआ, माइकल देबोव्रत पात्रा, श्री बिभु प्रसाद कानूनगो और शक्तिकांत दास ने 25 बेसिस अंक की कटौती के पक्ष में वोट किया था। 100 बेसिस एक 1 फीसदी के बराबर होता है। वहीं, रविंद्र एच ढोलकिया ने 40 बेसिस अंक की कटौती के पक्ष में वोट किया था।


अगस्त में खुदरा महंगाई दर मामूली बढ़ोत्तरी के साथ 3.21 फीसदी रही लेकिन यह RBI के 4 फीसदी टारगेट के भीतर है। MPC की अगली बैठक 3-5 दिसंबर को होगी।


आरबीआई ने कहा है कि कमजोर मांग की वजह से CPI में गिरावट आई है। 1 अक्टूबर तक विदेशी मुद्रा भंडार 43,460 करोड़ डॉलर था। पॉलिसी पर MPC का नरम रुख जारी रहेगा। ग्रोथ दोबारा पटरी पर लाने के लिए सुधार जरूरी है। आरबीआई ने कहा है कि अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रा सेक्टर में सुधार देखने को मिला है। घरेलू मांग की रिकवरी में कृषि का बड़ा योगदान है। रबी फसलों की पैदावार बेहतर रहने की उम्मीद है। कमजोर मांग के चलते रियल्टी सेक्टर में धीमापन रहा है। ग्रामीण, शहरी मांग में आगे भी धीमापन संभव है। कमजोर मांग के कारण Q2 GDP पर असर पड़ सकता है। दुनियाभर के बाजार में अब भी अनिश्चितता बरकरार है। दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों का रेट पर नरम रूख बना हुआ है। पॉलिसी पर आरबीआई MPC का नरम रुख जारी रहेगा। आरबीआई ने कहा है कि वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही के लिए ग्रोथ लक्ष्य 6.6-7.2 फीसदी और वित्त वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही के लिए ग्रोथ लक्ष्य 5.3 फीसदी तय किया गया है।


लिक्विडिटी की स्थिति देखकर OMO यानी ओपन मार्केट ऑपरेशन पर फैसला लिया जाएगा। OMO का इस्तेमाल आगे भी कर सकते हैं। वैसे अगस्त-सितंबर में सरप्लस लिक्विडिटी रही है। वित्त वर्ष 2021 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 7 फीसदी तय किया गया है। हर राज्य में 1 डिजिटल जिला बनाने का लक्ष्य रखा गया है। रेट कटौती फायदा का ग्राहकों तक जाने में तेजी आई है। ग्रोथ पर सरकार के उठाए कदमों की समीक्षा अभी बाकी है। ब्याज दरों में कटौती के असर की समीक्षा भी बाकी है। सरकार की ओर से अंतरिम डिविडेंड की मांग नहीं की गई है। पॉलिसी रेट के लिए कोई लोअर बैंड तय नहीं है। ग्रोथ में सुधार तक नरम रुख जारी रहेगा।


नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने RBI के रेट कट को ग्रोथ के लिए सकारात्मक कदम बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे आगे अच्छे नतीजे आएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए कई फिस्कल कदम उठा रही है ऐसे में आरबीआई की तरफ से मोनेटरी कदम उठाना सरकार और आरबीआई के बीच बेहतर तालमेल दिखता है। हमें उम्मीद है कि सरकार की तरफ से जो कदम उठाए गए है उसका असर दूसरी तिमाही के नतीजों पर दिखेगा। उन्होंने आगे कहा कि फेस्टिव सीजन में उपभोक्ता मांग में बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी।


टोयोटा किर्लोस्टर मोटर के वाइस चेयरमैन विक्रम किर्लोस्कर ने RBI के रेट कट का स्वागत किया है। लेकिन कहा है कि इसका असर तभी होगा जब रेट कट का फायदा ग्राहक तक पहुंचे।


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