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आरबीआई की दर कटौती है पर्याप्त या इकोनॉमी को चाहिए और बूस्टर डोज!

इकोनॉमी को स्लोडाउन से उबारने और फास्ट ट्रैक पर लाने के लिए एक जरूरी पुश रिजर्व बैंक ने दे दिया है।
अपडेटेड Aug 08, 2019 पर 11:54  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार ने 2024 तक देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन जिस दिन ये बात कही गई, उसके बाद से ही लगातार लग रहा है कि इस रास्ते में बहुत कांटे बिखरे हुए हैं। दुनिया में मंदी की आहट भारत की इकोनॉमी के लिए अच्छा संकेत नहीं है। घरेलू बाजार का हाल भी कुछ अलग नहीं है। ऑटो हो या कंज्यूमर गुड्स, सबके बाजार में मांग घट रही है। छोटे उद्यमियों से लेकर बड़ी इंडस्ट्री तक ग्रोथ के इंजन को दौड़ाने के लिए सरकार से बूस्टर डोज मांग रही है।
हालांकि RBI ने रेपो रेट में 0.35 प्रतिशत की से शुरुआत कर दी है। लेकिन अब सवाल ये है कि क्या आने वाले दिनों में इकोनॉमी को सपोर्ट करने के लिए वित्त मंत्री की तरफ से भी कुछ बड़े एलान आएंगे?


इकोनॉमी को स्लोडाउन से उबारने और फास्ट ट्रैक पर लाने के लिए एक जरूरी पुश रिजर्व बैंक ने दे दिया है। क्रेडिट पॉलिसी में RBI ने रेपो रेट में 0.35 प्रतिशत की कटौती कर दी है। RBI गवर्नर शक्तिकांता दास ने माना है कि इकोनॉमी में स्लोडाउन है। फिलहाल जितनी गुंजाइश बनती थी उसके हिसाब से राहत दी गई है।


रिजर्व बैंक ने लगातार चौथी बार रेट कम किया है। अब तक एक शिकायत ये रही है कि बैंक ब्याज घटाने में कंजूसी करते रहे हैं तो इस बार रिजर्व बैंक के एलान के साथ ही स्टेट बैंक ने इंटरेस्ट रेट कम करने का एलान कर दिया है। दूसरे बैंक भी अब पीछे नहीं रहेंगे।लेकिन सुस्त पड़ रही इकोनॉमी को रफ्तार देने के लिए रेट में कटौती एक रास्ता है। सरकार को दूसरे कदम भी जल्द लेने होंगे।


हाल के दिनों में कॉरपोरेट इंडिया की तरफ से स्लोडाउन के खतरे की बात जोरदार तरीके उठाई जा रही है और वो सरकार से एक्शन की मांग कर रहा है। बजाज ऑटो के राहुल बजाज, L&T के AM नाइक, HDFC के दीपक पारेख जैसे बड़े कॉरपोरेट लीडर अपनी चिंता जता चुके हैं।


सरकार भी ग्रोथ बढ़ाने के उपायों पर गंभीरता से विचार कर रही है। यही वजह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन इंडस्ट्री के नुमाइंदों से लगातार मिल रही हैं। MSME और ऑटो सेक्टर के प्रतिनिधि उनको अपनी परेशानी बता चुके हैं और कुछ ठोस कदम उठाने की मांग की है। सरकार जल्द एक्शन का भरोसा दिला रही है।


इकोनॉमी पर जो दबाव बना है वो एक दिन में नहीं बना है। डिमांड कम होने के लिए नोटबंदी की चर्चा अब भी गाहे बगाहे होती है। GST बड़ा टैक्स रिफॉर्म था लेकिन उसको लागू करने और शुरुआती दिक्कतों ने भी बिजनेस पर असर डाला है। IL&FS डिफॉल्ट के बाद NBFC सेक्टर में नकदी में भारी कमी आई है। अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर ने भी हमारी मुश्किलें बढ़ाई हैं। बजट में FPI के लिए नए सरचार्ज ने मार्केट को बेहाल कर रखा है।


ऐसे में क्या सरकार 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के सही प्रिस्क्रिप्शन पर काम कर रही है। क्या तुरंत ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए उसे राहत पैकेज लेकर आना चाहिए। क्या सरकार के पास ऐसे स्टिमुलस के लिए पैसे हैं? और सबसे बड़ी बात ये है कि क्या हालात हमारे कंट्रोल में है? क्योंकि खराब दौर में होने के बाद भी अगर चीजें काबू में हों तो ये आम लोगों से लेकर इंडस्ट्री और निवेशकों का भरोसा बनाए रखता है।