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एनबीएफसी को राहत देने के लिए आरबीआई ने उठाया ये बड़ा कदम

प्रकाशित Sun, 26, 2019 पर 12:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

नकदी के संकट से जूझ रहा एनएबीएफसी को राहत देने के मकसद से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने जोखिम प्रबंधन (रिस्क मैनेजमेंट) मसौदा जारी किया है। रिजर्व बैंक का मकसद है कि बड़ी कंपनियां एनबीएफसी कंपनियों में सरकारी बॉन्ड या जमा योजनाओं में निवेश करें। ताकि नकदी की किल्लत का सामना कर रही एनबीएफसी को भुगतान करने के लिए उपयुक्त रकम मिल सके।


 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एनबीएफसी के लिए नकदी जोखिम प्रबंधन रूपरेखा का मसौदा जारी किया है। केंद्रीय बैंक की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है कि जब कई बड़ी एनबीएफसी कंपनियां नकदी संकट से जूझ रही हैं। जिसके चलते उन्हें फंड जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।


आरबीआई के मसौदे के मुताबिक, 5,000 करोड़ रुपये और और उससे अधिक की संपत्ति की जमा राशि स्वीकार करने वाले सभी एनबीएफसी और ऐसे वित्तीय संस्थान जो जमा राशि स्वीकार नहीं करते उन सभी के लिए एलसीआर सिस्टम लागू किया जाएगा। एलसीआर की व्यवस्था को चार साल की अवधि में बढ़ाया जाएगा। एलसीआर के निर्देशों के मुताबकि वित्तीय कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी उधारी मोटे तौर पर उनके कर्ज के मेच्योरिटी से मेल खाती है कि नहीं।


साथ ही इस मसौदे में ये भी कहा गया है कि, एनबीएफसी को अपनी उच्च गुणवत्ता की नकदी संपत्तियों का हिस्सा बरकरार रखना होगा। ये उच्च गुणवत्ता वाली संपत्तियां नकदी जमा, सरकारी बॉन्ड हो सकते हैं।


मसौदे में ये भी कहा गया है कि एलसीआर आवश्यकता 1 अप्रैल 2020 से एनबीएफसी के लिए जरूरी होगा, जिसमें न्यूनतम एलसीआर 60 फीसदी होना चाहिए। इसके बाद एक अप्रैल 2024 तक इसे बढ़ाकर 100 फीसदी के स्तर तक पहुंचना होगा।


दरअसल, वित्त कंपनियों में जो रकम निवेश की गई थी वो ज्यादातर म्यूचुअल फंड योजनाओं का धन था। आईएलएंडएफएस फाइनेंसिएल सर्विसेज का संकट गहराने के बाद ऐसी कई योजनाओं को झटका लगा है।