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प्राइवेट बैंक अधिकारियों की सैलरी को लेकर RBI ने जारी किया नया फरमान

RBI ने बैंकों के अधिकारियों, CEO, होल टाइम डायरेक्टर्स और material risk takers को कंपनशेसन से संबंधित एक गाइडलाइंस जारी की है।
अपडेटेड Nov 05, 2019 पर 15:05  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Reserve Bank of India (RBI) इन दिनों किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रहा है। RBI बैंकों के अधिकारियों, CEO, होल टाइम डायरेक्टर्स और Material Risk Takers (MRT) को कंपनशेसन से संबंधित एक गाइडलाइंस जारी कर दी है। ये गाइडलाइंस 1 अप्रैल 2020 से लागू हो जाएगा। अगर किसी बैंक का फाइनेंशियली प्रदर्शन खराब आता है उसका कंपनसेशन कम किया जाना चाहिए। जिसे कम करके शून्य तक किया जा सकता है।


RBI की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, बैंकों को अपने सभी कर्मचारियों को कवर करते हुए एक कॉम्प्रीहेंसिव कंपनसेशन पॉलिसी बनानी चाहिए। 


RBI ने कहा कि फिक्स्ड पे और वैरिएब पे के बीच बैलेंस होना चाहिए। RBI के मुताबिक, CEO, WTD, MRT के लिए वैरिएबल पे शेयर-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स या कैश और शेयर-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स के रूप में होना चाहिए। साथ 50 फीसदी वेरिएबल पे होना चाहिए। साथ प्रदर्शन के आधार पर निर्भर होना चाहिए। 


RBI का कहना है कि अगर वैरिएबल पे फिक्स्ड पे का 200 फीसदी तक है, तो इसका कम से कम 50 फीसदी नॉन-कैश में होना चाहिए, और अगर वैरिएबल पे 200 फीसदी से ऊपर है, तो 67 फीसदी का भुगतान नॉन-कैश के जरिए किया जाना चाहिए।


केंद्रीय बैंक ने ये भी कहा कि सीनियर अधिकारियों के लिए होल टाइम डायरेक्टर्स और अन्य कर्मचारी जो बड़ा जोखिम लेने वाले हैं, उनका वैरिएबल पे के लिए Deferral Arrangements की सुविधा होनी चाहिए। साथ ही ये भी कहा कि वैरिएबल पे का कम से कम 60 फीसदी Deferral Arrangements के अधीन होना चाहिए।   


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