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रिलायंस जियो ने COAI पर पलटवार करते हुए लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप

AGR की रकम चुकाने के लिए बहानेबाजी हो रही है और इंडस्ट्री की हालत खस्ता बताने के पीछे गलत मकसद है।
अपडेटेड Nov 01, 2019 पर 10:51  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रिलायंस जियो ने COAI पर पलटवार करते हुए ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया है। जियो का कहना है कि AGR की रकम चुकाने के लिए बहानेबाजी हो रही है और इंडस्ट्री की हालत खस्ता बताने के पीछे गलत मकसद है। COAI ने सरकार को चिट्ठी लिखने से पहले जियो की राय तक नहीं ली, जो सरासर गलत है। COAI दो कंपनियों भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया का क्लब बनकर रह गया है।


JIO ने COAI पर भेदभाव का आरोप लगाया है। JIO के अनुसार COAI ने इंडस्ट्री को गलत तरीके से पेश किया है। वहीं Bharti ,Voda-Idea के पास पर्याप्त एसेट हैं और दोनों कंपनियां SC के फैसले से बच रही हैं। JIO ने कहा कि SC के फैसले पर COAI सवाल उठा रहा है। गौरतलब है कि सरकार को 92,000 करोड़ से ज्यादा की देनदारी है। COAI अब SC के आदेश की अवमानना कर रहा है। बता दें कि SC ने OCT 2011 में साफ किया था कि AGR की परिभाषा TRAI/TDSAT तय नहीं करेंगे।


सबसे अहम सवाल है कि साल 2011 से ही प्रॉवजिनिंग क्यों नहीं की गई। इससे फायदा प्रोमोटर का हो रहा जबकि नुकसान देश का होगा। अगर कंपनियां IBC में जाती हैं तो दिक्कत नहीं है। हालांकि प्रोमोटर बदलना कंपनियों के लिए बेहतर होगा। इसके साथ ही इनके ऑडिटर और CFO पर भी सवाल उठता है। ऐसे में कंपनियों को देनदारी के लिए आगाह क्यों नहीं किया।


RELIANCE JIO ने टेलीकॉम मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद को लिखी चिट्टी


टेलीकॉम कंपनियों के मामले पर Reliance Jio ने रविशंकर प्रसाद को चिट्ठी लिखी है। RELIANCE JIO का कहना है कि कंपनियों को बेलआउट पैकेज की जरूरत नहीं है। कंपनियां संपत्ति बेचकर बकाया चुका सकती हैं। इतना ही नहीं कंपनियां नई इक्विटी से भी बकाया चुका सकती हैं। RELIANCE JIO ने चिट्ठी में कहा है कि COAI टेलीकॉम इंडस्ट्री का प्रतिनिधि नहीं है।


JIO ने टेलीकॉम मंत्री से कहा है कि COAI की मांग को खारिज किया जाए और कंपनियों से SC आदेश के मुताबिक पेनाल्टी की रकम वसूली जाए। JIO ने स्पष्ट किया कि वे COAI के बेलआउट पैकेज की मांग से सहमत नहीं हैं क्योंकि कंपनियों के पास पर्याप्त वित्तीय क्षमता है। दूसरी तरफ टेलीकॉम कंपनियों के पास फंड की किल्लत नहीं है। वहीं COAI सिर्फ 2 सर्विस प्रोवाइडर के पक्ष में है और हम COAI के जिद्दी रवैये का विरोध करते हैं।


(डिस्क्लेमरः मनीकंट्रोल डॉट कॉम नेटवर्क 18 समूह का हिस्सा है। मनीकंट्रोल डॉट कॉम और अन्य डिजिटल, प्रिंट और टीवी चैनल नेटवर्क 18 के अंतर्गत आते हैं। नेटवर्क 18 का स्वामित्व और प्रबंधन रिलायंस इंडस्ट्रीज के हाथ में है।)


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