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महंगाई के मोर्चे पर राहत, कब घटेंगी ब्याज दरें!

प्रकाशित Wed, 05, 2018 पर 17:03  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आरबीआई की क्रेडिट पॉलिस उम्मीदों के मुताबिक जस की तस रही। सिर्फ एसएलआर में 0.25 फीसदी की कटौती की गई है। माना जा रहा कि एनबीएफसी को लिक्विडिटी की दिक्कतों को दूर करने के लिए ये कदम उठाया गया। लेकिन ब्याज दरें फिलहाल नहीं बढेंगी। यानि ईएमआई आपका महंगा नहीं होगा और आरबीआई ने अगले वित्त वर्ष में भी महंगाई को 5 फीसदी से नीचे ही रहने का अनुमान दिया है। तो सवाल ये है कि आगे कब घटेंगे रेट।


रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट 6.5 फीसदी पर बरकरार रहेगा। वहीं रिवर्स रेपो रेट 6.25 फीसदी पर कायम रहेगा। यानि अब आपकी ईएमआई बढ़ने का खतरा नहीं है।


आरबीआई ने वित्त वर्ष 2019 में जीडीपी ग्रोथ अनुमान 7.4 फीसदी बरकरार रखा है। आरबीआई का अनुमान है कि अक्टूबर-मार्च अवधि में जीडीपी ग्रोथ 7.2 से 7.3 फीसदी के बीच रह सकती है।


महंगाई के मोर्चे पर भी राहत के संकेत हैं। अक्टूबर से मार्च के लिए रिटेल महंगाई का अनुमान 2.7 से 3.2 फीसदी का है। आरबीआई मॉनिटरी कमोटी के 6 में से 5 सदस्य दर बरकरार रखने के पक्ष में थे। आपको बता दें कि सीएनबीसी-आवाज़ के पोल में ये साफ दिखा था कि इस बार दरों में कोई बदलाव नहीं होगा।


आरबीआई ने एसएलआर में 0.25 फीसदी की कटौती की है। एसएलआर की मौजूदा दर 0.5 फीसदी है। आरबीआई ने कहा कि जनवरी-मार्च से एसएलआर में गर तिमाही 0.25 फीसदी की कटौती की जाएगी। आरबीआई की नीति बैठक में रिवर्स रेपो रेट को 6.25 फीसदी पर बरकरार रखा गया है।


आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि महंगाई अनुमान से कम रही तो कर्ज सस्ता हो सकता है। केंद्र और राज्य सरकारों के घाटे पर नजर बनी हुई है। वित्तीय घाटा बढ़ा तो महंगाई पर असर पड़ सकता है। आने वाले वक्त में महंगाई की सही चाल का अंदाजा होगा। महंगाई का ट्रेंड देखने के बाद ही सही फैसला लिया जा सकेगा। उन्होने आगे कहा कि ग्रोथ को लेकर चिंता नहीं है। आगे अगर महंगाई अनुमान से कम रही तो नरम रुख अपनाया जायेगा।


रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा कि एनबीएफसी में लिक्विडिटी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। आरबीआई ने एनबीएफसी की मदद के लिए कदम उठाए हैं, जरूरत पड़ी तो आरबीआई कर्ज देने को तैयार है।