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राहत पैकेज-5: कैश क्राइसिस में फंसी कंपनियों को बड़ी राहत, IBC कानून में किया बदलाव

इन्सॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स शुरू करने के लिए मिनिमम थ्रेसहोल्ड लिमिट 1 करोड़ रुपये कर दी है। अभी तक यह 1 लाख रुपये थी
अपडेटेड May 18, 2020 पर 09:51  |  स्रोत : Moneycontrol.com

20 लाख रुपये के आर्थिक पैकेज की पांचवीं किस्त फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने रविवार को जारी की। इस किस्त में लैंड, लेबर, लिक्विडिटी और लॉ पर जोर दिया। उन्होंवने सात सेक्टर की घोषणा की। इसमें मनरेगा, हेल्थ  ऐंड एजुकेशन, बिजनस, डी-क्रिमिनलाइजेशन ऑफ कम्परनीज ऐक्टम, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पब्लिक सेक्टडर एंटरप्राइजेज, राज्यन सरकारें और उन्हेंी दिए गए रिसोर्सेज शामिल हैं।
 
निर्मला सीतारमण ने कंपनियों को लिए बड़ी राहत दे दी है। IBC कानून में बदलाव किया है। इन्सॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स शुरू करने के लिए मिनिमम थ्रेसहोल्ड लिमिट 1 करोड़ रुपये कर दी है। अभी तक यह 1 लाख रुपये थी। इसका फायदा उन कंपनियों को मिलेगा, जिन्हें कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते नुकसान हुआ है। लिहाजा संकट से जूझ रहीं कंपनियों के लिए सीतारमण का यह एक राहत भरा कदम है। इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत कोरोना वायरस के चलते लोन को डिफॉल्ट की श्रेणी में नहीं डाला जाएगा। इससे कंपनियों को इन्सॉल्वेंसी के लिए फाइलिंग नहीं करने से राहत मिलेगी। छोटे और मझोले उद्योगों के लिए एक स्पेशल इन्सॉल्वेंसी  प्रोसीजर लाए जाएंगे। इन्सॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स की नई कार्यवाही के सस्पेंशन को 1 साल तक बढ़ाया जा रहा है।


CSR की रिपोर्टिंग में कमी रहने, बोर्ड की रिपोर्ट में कमी रहने या एनुअल जनरल मीटिंग कराने में थोड़ी देरी जैसी प्रक्रियाओं में अगर कोई छोटी चूक रह जाती है तो इसे अपराध के दायरे में नहीं लाया जाएगा। यानी अपराधिक मामलों में नहीं घसीटा जाएगा। 7 ऐसे कंपाउंडेबल ऑफेंस हैं, जिसे अपराध की कैटिगरी से बाहर रखा जाएगा। इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। सभी सेक्टर प्राइवेट कंपनियों के लिए खोले जाएंगे।


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