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सुप्रीम कोर्ट ने वेतन कटौती-छंटनी के खिलाफ दाखिल IT कर्मचारियों की याचिका की खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई को आईटी कर्मचारियों की छंटनी और वेतन कटौती के खिलाफ दायर की गई जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।
अपडेटेड May 17, 2020 पर 07:55  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई को आईटी कर्मचारियों की छंटनी और वेतन कटौती के खिलाफ दायर की गई जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में आईटी कर्मचारियों ने इस बात की मांग की थी कि COVID-19 महामारी के इस दौर में उनको वेतन कटौती और छंटनी से सुरक्षा मिलनी चाहिए।


जस्टिस एल नागेश्वर राव, संजय किशन कौल और बी आर गवई की सदस्यता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका महाराष्ट्र स्थिति आईटी कर्मचारियों के संगठन नेशनल इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लाइज सिनेट द्वारा दाखिल की गई थी।


इस अपील को खारिज करने वाले ऑर्डर में कहा गया है कि हम भारतीय संविधान के आर्टिकल 32 के तहत इस याचिका की सुनवाई के इच्छुक नहीं है। अत: इस याचिका को खारिज किया जाता है।


बता दें कि संविधान के आर्टिकल 32 में दिए गए प्रावधान के मुताबिक कोई व्यक्ति अपने मूल अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में अपील करने का अधिकार रखता है। यह पिटीशन प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को अवैध छंटनी और वेतन कटौती से बचाने के लिए संविधान के आर्टिकल 14 के 19(1)(g) और 21 का हवाला देते हुए दाखिल की गई थी।


गौरतलब है कि कोरोना संकट काल में बहुत सारी कंपनियां केंद्र और राज्य सरकारों के दिशा-निर्देशों का उल्घंघन करते हुए अपने कर्मचारियों की छंटनी कर रही है या उनके वेतन में कटौती कर रही हैं। इस पीटीशन में कहा गया है कि देश की कई आईटी कंपनियां बड़ी संख्या में अवैधानिक तरीके से कर्मचारियों को काम से निकाल रही है या उनका वेतन घटा रही हैं।


गौरतलब है कि पूरी दुनिया में कोरोना के कहर के चलते उद्योग जगत में संकट छाया हुआ है। इससे आईटी कंपनियां भी अछूती नहीं है। कोरोना संकट काल में भारत में भी कई आईटी  कंपनियों की तरफ से इस तरह की खबरें आई हैं। टेक महिंद्रा और केपीआईटी टेक्नोलॉजी इसके उदाहरण है जिनको लेबर कमिशन की तरफ से कर्मचारियों के वेतन में कटौती करने या उनकी छंटनी करने की शिकायत मिलने पर कड़ी चेतावनी के साथ नोटिस भी भेजी गई है।




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