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ब्याज छूट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान, आर्थिक पहलू जनता की सेहत से ऊपर नहीं

ब्याज छूट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान आया है। सुप्रीम कोर्ट ने RBI से कहा है कि आर्थिक पहलू जनता की सेहत से ऊपर नहीं हैं।
अपडेटेड Jun 05, 2020 पर 08:30  |  स्रोत : Moneycontrol.com

ब्याज छूट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान आया है। सुप्रीम कोर्ट ने RBI से कहा है कि आर्थिक पहलू जनता की सेहत से ऊपर नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि RBI ने मोरेटोरियम दिया है लेकिन ब्याज छूट नहीं दी है। ब्याज छूट न देना ज्यादा हानिकारक है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 12 जून को अगली सुनवाई करेगा।


लॉकडाउन के दौरान ग्राहकों के लोन के ब्याज माफी पर सुप्रीम कोर्ट ने अब वित्त मंत्रालय से जवाब मांगा है । सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक ब्याज ग्राहकों की सेहत से ज्यादा जरूरी नहीं है और संकट के समय में बैंकों को ब्याज और ब्याज के ऊपर ब्याज नहीं चार्ज करना चाहिए। बुधवार को रिजर्व बैंक ने हलफनामा दायर करके कहा था कि ब्याज की माफी नहीं हो सकती है इससे बैंकों की सेहत पर असर पड़ेगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय से 12 जून तक जवाब दाखिल करने को कहा है। 


बता दें कि RBI ने ब्याज मोराटोरियम पीरियड 3 से बढ़ाकर 6 महीने कर दिया है। मोराटोरियम के दौरान बैंक ब्याज भी चार्ज कर रहे हैं। इस मामले पर SC ने पहले RBI से जवाब मांगा था।  RBI ने जवाब में कहा कि ब्याज नहीं माफ हो सकता। ब्याज माफ करने से बैंकों की सेहत पर असर पड़ेगा।आरबीआई ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके कहा था कि अगर ब्याज माफी की जाती है तो इससे बैंकों को 2 लाख करोड़ रुपये का घाटा होगा।  मामले पर SCने वित्त मंत्रालय से जवाब मांगा है। इस पर सरकार ने कहा है कि इस मु्ददे पर वित्त मंत्रालय में चर्चा जारी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट को विस्तृत जानकारी देंगे। 12 जून से पहले वित्त मंत्रालय अपना जवाब दाखिल करेगा।


CNBC-TV18 की खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आगे कहा कि आरबीआई ब्याज छूट मामले को मीडिया को खबरे लीक करके सनसनीखेज बनाने की कोशिश कर रहा है।


सूत्रों के मुताबिक SC की टिप्पणी पर वित्त मंत्रालय की राय है कि  सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणी की समीक्षा की जाएगी। इस समीक्षा के आधार पर कोर्ट में पक्ष रखा जाएगा। वित्त मंत्रालय में ब्याज पर ब्याज न वसूलने पर चर्चा हुई थी। ब्याज छूट देने पर सहमति नहीं बनी थी। सरकार का मानना है कि एक को छूट देने से दूसरा सेक्टर भी मांग करेगा। हालांकि होम लोन और MSME लोन जैसे सेगमेंट पर ब्याज छूट देने की राय थी। वित्त मंत्रालय का कहना है कि सभी तरह के लोन को ब्याज से छूट देना मुश्किल है। इससे बैंकों की सेहत पर उल्टा असर पड़ेगा।


CII के  प्रेसिडेंट उदय कोटक ने कहा RBI ने अपनी तरफ से सारी स्थिति साफ की है बैंकों को डिपॉजिटर्स के हितों का खयाल भी रखना है। 
 




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