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स्टूडेंट्स हाउसिंग की मांग से बना बिजनेस आइडिया, जानिए Stanza Living का क्या है स्टार्टअप फंडा

स्टैंजा लिविंग को-लिविंग मॉडल के तहत पॉकेट-फ्रेंडली दाम पर हॉस्टल स्पेस मुहैया करा रहा है।
अपडेटेड Oct 23, 2019 पर 12:55  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पढ़ाई के लिए अक्सर स्टूडेंट्स को अपना शहर छोड़कर दूसरे शहरों में शिफ्ट होना पड़ता है। इसी माइग्रेशन के साथ जरूरत तलाश शुरू होती है अपने मन मुताबिक जगह की। स्टूडेंट्स की इन्हीं जरूरतों को बिजनेस मॉडल में बदला स्टार्टअप स्टैंजा लिविंग ने। स्टैंजा लिविंग को-लिविंग मॉडल के तहत पॉकेट-फ्रेंडली दाम पर हॉस्टल स्पेस मुहैया करा रहा है।


कई स्टूडेंट्स की तरह ही साक्षी भी पटना में अपना घर छोड़ दिल्ली यूनिवर्सिटी में ग्रैज्यूएशन के लिए आईं। लेकिन एक अच्छा हॉस्टल तलाशना यूनिवर्सिटी में दाखिले जितनी ही दिक्कत का काम बन पड़ा। ऐसे में उन्हें मनपसंद फैसिलिटीज के साथ हॉस्टल मिला स्टार्टअप स्टैंजा लिविंग की मदद से।


एजुकेशन हब बन चुके शहरों में स्टूडेंट हाउसिंग की मांग ने जोर पकड़ा है। इसी सेगमेंट में ग्रोथ के मौके देखते हुए अनिंद्य दत्ता और संदीप दालमिया ने साल 2017 में स्टैंजा लिविंग की शुरुआत की। आप स्टेंजा लिविंक के ऐप या वेबसाइट के जरिए हॉस्टल ढूंढ़ सकते हैं, अपने हिसाब से रुम टाइप और सर्विस चुन सकते हैं और क्या खाएंगे ये भी तय कर सकते हैं। इन सभी सुविधाओं के लिए शुरुआती कीमत 5 हजार रुपए महिना है।


फिलहाल देश में 10 शहरों में स्टैंजा लिविंग अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है और कुल 30 हजार बेड ऑफर पर हैं।  2018-19 में कंपनी का रेवेन्यू 20 करोड़ रुपए से ज्यादा रहा है। शुरुआती दौर से ही स्टैंजा लिविंग के बिजनेस मॉडल पर इन्वेस्टर्स ने भरोसा दिखाया और उनसे फंडिंग अब भी जारी है। स्टूडेंट्स की बदलती जरूरतों के साथ ही स्टैंजा लिविंग भी बदलाव कर रहा है। 10 शहरों में पहुंचने के बाद अब लक्ष्य तेजी से विस्तार का है।