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सेंसेक्स 53,000 पर, जानिए इक्विटी फंड निवेशकों की अब क्या हो निवेश रणनीति?

जून 2021 में किए गए मनीकंट्रोल मार्केट सेटिमेंट सर्वे में शामिल 10 में से 6 घरेलू फंड मैनेजरों ने कहा था कि अगले 1 साल में इक्विटी मार्केट्स हमें सबसे बेहतर रिटर्न देगा
अपडेटेड Jul 15, 2021 पर 17:59  |  स्रोत : Moneycontrol.com

JASH KRIPLANI


इक्विटी  मार्केट की रैली थमती नजर नहीं आ रही है। मार्च 2020 के लो से सेसेंक्स ने अब तक 103 फीसदी का रिटर्न दिया है। इसी अवधि में मिड और स्मॉल कैप फंडों ने 92 और 117 फीसदी का रिटर्न दिया है। बाजार में किसी तरह का डर नहीं दिख रहा है लेकिन आरबीआई ने अपनी 2020-21 की एनुअल रिपोर्ट में चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि  स्टॉक मार्केट में आर्थिक मंदी के बावजूद  जोरदार रैली बबल फटने का डर पैदा कर रहा है।


बाजार को लेकर ब्रोकरेज हाउस भी पॉजिटिव नजर आ रहे है। मॉर्गन स्टैनली ने भी कहा है कि इस साल के अंत तक सेसेंक्स में 55000 तक का लेवल देखने को मिल सकता है। साल के शुरुआत में ही  BofA Securities ने निफ्टी के लिए इस साल के अंत तक का टार्गेट 17000 का रखा था जो कि निफ्टी के वर्तमान स्तर से 5 फीसदी नीचे है।


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जून 2021 में किए गए मनीकंट्रोल मार्केट सेटिमेंट सर्वे में शामिल 10 में से 6 घरेलू फंड मैनेजरों ने कहा था कि अगले 1 साल में इक्विटी मार्केट्स हमें सबसे बेहतर रिटर्न देगा और निफ्टी इस अवधि में 17000 का स्तर आसानी से छू सकता है। बाजार में इस तरह की अलग-अलग राय के बीच इक्विटी फंड इन्वेस्टमेंट पर अपनी राय कायम करना काफी मुश्किल है। यहां हम आपकी सुविधा के लिए इ मुद्दे पर अपनी राय दे रहे हैं।

अपने निवेश गोल के मुताबिक लें निर्णय


बाजार की अब तक की रैली को देखते हुए मन में कुछ मुनाफा समेटने की बात आ रही होगी लेकिन आपका लक्ष्य कई सालों के लिए लंबी अवधि के लिए है तो इक्विटी म्युचुअल फंडो में अपना निवेश बनाए रखें और अगर आपका निवेश 6-12 महीनों की अवधि के लिए है तो कुछ मुनाफावसूली कर लें।


फाइनेंशियल प्लानरों का कहना है कि आपको इक्विटी फंड में निवेश से निकलने की जरुरत नहीं है। आपको सिर्फ अपने पोर्टफोलियों को री-बैलेंस करना है। इसका मतलब यह है कि आपको अपने कुछ पैसे इक्विटी फंड से निकालकर डेट फंड में डालने है और यह  करते वक्त यह ध्यान रखना है कि आपका ओरिजनल अलोकेशन लेवल बना रहें।


उदाहरण के लिए मान लीजिए आपने अपने निवेश की शुरुआत 65 फीसदी इक्विटी और 35 फीसदी डेट अलोकेशन से किया हो लेकिन इक्विटी मार्केट में अब तक की रैली ने आपके अलोकेशन का अनुपात बदल दिया होगा और इस समय आपका अलोकेशन 80 फीसदी इक्विटी में और 20 फीसदी डेट में आ गया होगा। इस स्थिति में 65:35 का रेश्यो बनाए रखते हुए  इक्विटी से कुछ मुनाफावसूली कर डेट में डाल दें।


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Plan Rupee Investment Services के अमोल जोशी का कहना है  कि अगर आपने अलग-अलग इक्विटी स्कीमों में निवेश कर रखा है तो आप ज्यादा जोखिम वाले स्मॉल और मिडकैप से निकलकर लॉर्जकैप स्कीम में स्विच कर जाएं। उन्होंने आगे कहा कि सभी निवेशकों के लिए रीबैलेसिंग की  जरुरत नहीं है। जिन निवेशकों की ज्यादा  जोखिम उठाने की क्षमता है वो इक्विटी, मिड और स्म़ॉल फंडों में अपना निवेश बनाए रख सकते है। 

SRE Wealth के Kirtan Shah का कहना है कि अगर आप 2 साल के लिए निवेश करना चाहते है तो इक्विटीज से दूर रहें। नियर टर्म में हम इस बात का अंदाजा नहीं लगा सकते है कि मार्केट किस तरफ जाएगा। इसके अलावा 1-2 साल तक बाजार में महंगाई और कोरोना महामारी के चलते भारी उतार-चढ़ाव और जोखिम बना रहेगा।


उन्होंने आगे कहा कि  नए  निवेशक जोखिम से बचने के लिए बैलेंस एडवांटेज फंड में निवेश कर सकते हैं। इस तरह के फंड स्टॉक मार्केट में वैल्यूएशन ज्यादा होने पर इक्विटी मे निवेश कम कर देते हैं और जब बाजार में करेक्शन आता है तो  इक्विटी में  निवेश बढ़ा देते हैं लेकिन इस तरह के फंडों का चुनाव भी क्वालिफाइड फाइनेशिंयल प्लानर की सलाह से ही करें।


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