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उतार-चढ़ाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी 1% उछले, 50 से ज्यादा smallcaps में दिखी 10-36% की बढ़त

पिछले कारोबारी हफ्ते में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों नया हाई छुआ
अपडेटेड Aug 29, 2021 पर 08:26  |  स्रोत : Moneycontrol.com

वोलैटिलिटी के बीच बाजार में एक प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई क्योंकि निवेशक फेड के परिणाम चीन और अमेरिका के बीच नए सिरे से तनाव और दुनिया भर में डेल्टा वैरियेंट के बढ़ते मामलों की आशंका के प्रति से पहले से ही सतर्क थे।


भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स और निफ्टी ने क्रमशः 56,198.13 (25 अगस्त को) और 16,722.05 (27 अगस्त को) के अपने नए रिकॉर्ड उच्च स्तर को छुआ। हालांकि पिछले कारोबारी हफ्ते के लिए बीएसई सेंसेक्स 795.4 अंक (1.43 प्रतिशत) बढ़कर 56124.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 254.7 अंक (1.54 प्रतिशत) बढ़कर 16705.2 के स्तर पर बंद हुआ।


वहीं ब्रॉडर इंडेक्स ने BSE मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्सेस के साथ 2-2.5 प्रतिशत बढ़त बनाते हुए मेन इंडेक्सेस के साथ बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।


स्मॉलकैप में 50 से ज्यादा शेयरों में 10-36 प्रतिशत की तेजी रही। इनमें BLS International Services, Zen Technologies, Adani Total Gas, ABB Power Products, HLE Glascoat, Gayatri Projects, Linde India और Sudarshan Chemical Industries जैसे नाम शामिल हैं।


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वहीं दूसरी तरफ Capacite Infraprojects, Karda Construction, NELCO, Sadbhav Engineering, Wockhardt, Ujjivan Financial Services और Inox Wind में 10-23 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।


Geojit Financial Services के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि इस हफ्ते मिड और स्मॉल कैप शेयरों पर फोकस रहा क्योंकि वैल्यू बायिंग से इन सेक्टर्स में रिकवरी आई है और इसका परफॉर्मेंस बेहतर हुआ है।


नायर ने आगे कहा कि अगले सप्ताह में बाजार में Q1 GDP ग्रोथ रेट और Manufacturing & Service PMI जैसे प्रमुख आर्थिक डेटा जारी होने की उम्मीद है। इस तिमाही के अंत में लो बेस और आर्थिक गतिविधियों में रिकवरी से Q1 जीडीपी में तेज ग्रोथ दिखने की उम्मीद है।


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Kotak Securities के श्रीकांत चौहान ने कहा कि भारतीय बाजार की फेड, कमोडिटी की कीमते, भारत में वैक्सीनेशन की गति, विभिन्न राज्यों द्वारा अनलॉक की प्रक्रिया, जीएसटी कलेक्शन, पूरे भारत में बढ़ते हुए मानसून, एसेट मोनेटाइजेशन प्रोग्राम (AMP) की प्रगति और केंद्र सरकार के द्वारा किये जाने वाले अन्य सुधारों पर निगाहें रहेंगी।


चौहान ने आगे कहा कि बाजार में सामान्य तेजी और IPOs की भरमार के बावजूद FPI inflows बहुत उत्साहजनक नहीं रहे हैं। हमें उम्मीद है कि निकट भविष्य में FPI inflows अस्थिर होगा, एसेट्स के कम होने की संभावना है, जिसका दुनिया भर के इक्विटी बाजारों (global equity markets) पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसके अलावा विकसित अर्थव्यवस्थाओं में COVID-19 की तीसरी लहर का असर भी कुल फ्लो (overall flow) पर असर डालेगा।  


(डिस्क्लेमरः  Moneycontrol.com पर दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह निवेश विशेषज्ञों के अपने निजी विचार और राय होते हैं। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें। )


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