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सिंगल यूज प्लास्टिक पर हल्ला बोल, सरकार की अपील का क्या होगा असर?

प्लास्टिक मुक्त भारत, ये कहने में जितना सरल और सुहावना है, करने में उतना ही मुश्किल है।
अपडेटेड Sep 10, 2019 पर 17:04  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

प्लास्टिक मुक्त भारत, ये कहने में जितना सरल और सुहावना है, करने में उतना ही मुश्किल है। प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने के हमारे अब तक के तजुर्बे तो यही कहते हैं। लेकिन प्रयास जारी हैं और चाहे बहुत कम सही, मगर कामयाबी भी मिल ही रही है। अब तो केंद्र सरकार भी रणनीति बनाकर मैदान में आ चुकी है और खुद प्रधानमंत्री आपसे कह रहे हैं कि कम से कम सिंगल यूज प्लास्टिक को विदा करने का वक्त आ गया है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर को अपने जीवन से सिंगल यूज प्लास्टिक को निकाल बाहर करने की अपील की है। पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सरल जीवन के लिए ये बेहत जरूरी पहल है। धरती को बंजर होने से बचाने के संयुक्त राष्ट्र के अभियान पर बोलते हुए भी प्रधानमंत्री ने दुनिया को प्लास्टिक मुक्त करने की जरूरत पर जोर दिया।


साफ है कि भारत प्लास्टिक के खिलाफ अभियान का अगुवा बनेगा। सरकार की तरफ से इसके लिए प्रयास शुरू किए जा चुके हैं। सबसे पहला निशाना सिंगल यूज प्लास्टिक पर है। बड़ी बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर सिंगल यूज को बैन करने और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने का रोडमैप बनाया जा रहा है।


प्लास्टिक के खिलाफ हमारे अब तक के तजुर्बे बहुत कामयाब नहीं रहे हैं। कई राज्यों में बैन के बावजूद प्लास्टिक की थैलियां इस्तेमाल में हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ये रही है कि इस्तेमाल पर बैन भले हो जाए, प्लास्टिक निर्माण पर बैन के बिना ये पूरी तरह सफल नहीं हो सकता। दूसरी तरफ प्लास्टिक बनाने, बेचने में लगे कारोबारियों के लिए रातोंरात धंधा बदल देना संभव नहीं है।


यही नहीं प्लास्टिक हमारी जिन्दगी में इस तरीके से घर कर चुका है कि इसे निकालने के लिए बड़ी तैयारी और लंबे वक्त की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार को संतुलित और विवेकपूर्ण तरीके से कदम उठाने होंगे, कारोबारियों को अपनी भूमिका निभानी होगी और सबसे बड़कर आम उपभोक्ता को आदतें बदलनी होगी।