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राज्यों ने लेबर कानूनों को रद्द करने की शुरुआत, केंद्र सरकार भी आई छूट के पक्ष में

कई राज्यों ने श्रमिकों के हितों का ख्याल रखने वाले लेबर कानूनों को कुछ सालों के लिए रद्द कर दिया है।
अपडेटेड May 12, 2020 पर 14:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लॉकडाउन के बाद वर्किंग क्लास की मुश्किलें बढ़ सकती है। कई राज्यों ने श्रमिकों के हितों का ख्याल रखने वाले लेबर कानूनों को कुछ सालों के लिए रद्द कर दिया है। श्रम मंत्रालय के साथ बैठक में इंडस्ट्री ने ये मांगें सामने रखी हैं।


दरअसल राज्यों ने लेबर कानूनों को रद्द करने की शुरुआत की है। UP, MP ने कुछ प्रावधानों को छोड़कर 3 साल के लिए कानून रद्द कर दिया है जबकि कई राज्यों की निवेश बढ़ाने के लिए छूट की तैयारी की है। इधर केंद्र सरकार भी लेबर कानूनों में छूट देने के पक्ष में नजर आ रही है।


बता दें कि इंडस्ट्री ने श्रम मंत्रालय के साथ बैठक मेंलेबर कानूनों को रद्द करने की मांग करते हुए पूरे देश में श्रम कानून 2-3 साल तक रद्द करने को कहा है। श्रम मंत्रालय मांगों पर विचार कर रहा है। कानून रद्द होने से हायर एंड फायर की इजाजत मिलेगी।


अगर कानून रद्द होता है तो लेबर के पास कंपनी के खिलाफ कोर्ट जाने की इजाजत नहीं होगी। लेबर की सुविधाओं की बाध्यता कंपनी पर नहीं होगी। हालांकि कानून रद्द होने के बाद भी न्यूनतम आय की शर्तें लागू रह सकती हैं।


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