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आयुष्मान भारत का स्टेटस चेक

प्रकाशित Thu, 04, 2018 पर 11:50  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आयुष्मान भारत के तहत 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा देने वाली प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानि पीएम जय को लॉन्च हुए एक हफ्ते से ज्यादा हो चुका है। भारत कैसे आयुष्मान बन रहा है। योजना कागजों से निकल कर लोगों तक कितनी पहुंची है जानने की कोशिश की हमारे संवाददाता प्रतीक श्रीवास्तव ने।


आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोगों को अपनी पात्रता का पता नहीं चल पा रहा है। कई जरूरतमंद ऐसे भी हैं जो गरीब हैं फिर भी योजना का हिस्सा नहीं हैं क्योंकि तकनीकी तौर पर उनको शामिल नहीं किया जा सकता है। गाजियाबाद के संयुक्त जिला चिकित्सालय में हमें एक ऐसी ही महिला रीना मिली। रीना के पास गरीबी का सबूत अंत्योदय कार्ड भी था। पर फिर भी वह आयुष्मान भारत के तहत 5 लाख का बीमा नहीं पा सकती थी क्योंकि इसके लिए गरीब होना काफी नहीं है। 2011 की जनगणना आधारित आयुष्मान लाभार्थी सूची में नाम भी होना चाहिए। महिला के आंसू बताने के लिए काफी थे कि उसे इंश्योरेंस की कितनी जरूरत है फिर भी उस से महरूम है।


50 करोड़ लोग शामिल होने के बावजूद लाभार्थी सूची छोटी और गरीब का दर्द बड़ा लग रहा था। लेकिन समस्या उन लोगों की भी कम नहीं थी जो इस स्कीम में शामिल थे पर फिर भी अपने नाम की पहचान नहीं कर पा रहे थे नाम की पहचान करने के लिए आयुष्मान भारत के तहत जन आरोग्य योजना के डिप्टी सीईओ दिनेश अरोड़ा ने हमें बेनेफिशरी की पहचान का तरीका बताया।


आप भी जानिए सबसे पहले नाम सर्च करना होगा। फिर उसके प्रदेश का नाम डालें जिसके बाद शहर का नाम डाला जाएगा। व्यक्ति की उम्र डालें और आखिरी में पिता का नाम भरने के बाद उस व्यक्ति की फैमिली डिटेल आ जाएगी। इस तरह वेबसाइट पर जा कर लोकेट किया जा सकता है। ये सारी डिटेल मैसेज के जरिए अपने मोबाइल पर भी ली जा सकती हैं।


प्रकिया जानने के बाद अब हमारा अगला इरादा जमीनी हकीकत जानने का था। इसलिए हम दिल्ली से नोएडा की तरफ आगे बढ़ गए क्योंकि दिल्ली समेत 5 राज्यों में अब भी योजना की शुरुआत होनी बाकी है। अब बारी थी जमीनी हकीकत खंगालने की। सरकारी और निजी अस्पतालों में कैसी चल रही है योजना जाना हमारे संवाददाता ने।


योजना को लागू हुए 1 हफ्ते का वक्त बीत रहा है। योजना के लाभार्थियों के लिए मुफ्त और बेहतर इलाज पाना कितना आसान कितना मुश्किल हुआ है समझने की कोशिश करते हैं। शुरुआत फोर्टिस अस्पताल से।


फोर्टिस अस्पताल पहुंचने के बाद अंदर बातचीत की गई तो मालूम चला कि इस ग्रुप का यह अस्पताल अभी योजना में शामिल नहीं है सिर्फ यही नहीं बड़ी हॉस्पिटल चेन जहां अच्छे और इलाज का दावा किया जाता है वह अब तक योजना से पूरी तरह नहीं जुड़ी है। यहां से चलते हैं गाजियाबाद और उन अस्पतालों को खंगालते हैं जो पैनल में मौजूद हैं।


विजय और आकाश दोस्त हैं। दोनों पता लगाना चाहते हैं कि क्या उनका परिवार भी 5 लाख रुपये के बीमे का हकदार है? नियमों के मुताबिक पैनल में मौजूद अस्पताल लाभार्थियों की पहचान करेगा। खुद उनकी जुबानी सुनिए के अस्पताल में इनके साथ क्या हुआ। साफ है पैनल में मौजूद निजी अस्पताल पर इलाज मिलना तो दूर की बात है लाभार्थियों की पहचान भी नहीं की जा रही है। यहां से निकल कर हम पैनल पर मौजूद गणेश अस्पताल पहुंचे।


यहां तक हम समझ चुके थे कि निजी अस्पतालों में फिलहाल आयुष्मान भारत का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अब बारी थी सरकारी अस्पताल की। यह जानने की बारी थी कि यहां पर आयुष्मान भारत के तहत इलाज के लिए जरूरी कार्ड बनाया जा रहा है या नहीं? योजना की जमीनी हकीकत आपके सामने हैं लेकिन शासन और प्रशासन आंकड़ों की बाजीगिरी किस तरह से कर रहे हैं। वह भी जान लीजिए।


आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में 10 करोड़ परिवारों यानी करीब 50 करोड़ लोगों को पांच लाख का स्वास्थ्य बीमा मुफ्त मिलना है। दावा है कि इसके जरिए सरकारी और निजी अस्पतालों में लाभार्थी इलाज करा सकता है। योजना शुरू हो चुकी है और मीटर सरपट भाग रहा है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक की योजना के तहत 42,352 ई-कार्ड जारी किए जा चुके हैं। अस्पतालों में आयुष्मान भारत के तहत 25,407 लाभार्थी भर्ती हैं। अब तक 18,837 क्लेम किए जा चुके हैं और 36.60 करोड़ लाख रुपये की रकम क्लेम की जा चुकी है। यानि प्रति व्यक्ति औसत क्लेम की रकम है 29,111 रुपये। पैनल पर आने के लिए 31,376 अस्पताल आवेदन दे चुके हैं और मौजूदा अस्पतालों की संख्या 13,731 है।


इसका मतलब यह हुआ कि लाभार्थियों के पास विकल्प खुला हुआ है वह चाहे निजी अस्पताल जाए या फिर सरकारी। सरकारी अस्पताल में जो सेवाएं मुफ्त मिलती हैं वह भी कार्ड दिखाने पर आपकी बीमे की रकम से काटी जाएंगी। अगर आप आयुष्मान भारत के लाभार्थी हैं तो यह पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है कि इलाज के लिए आप अपना कार्ड दिखाएं या ना दिखाएं या फिर कार्ड दिखाएं गैर सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज ले ले और फिर उसकी रकम प्राइवेट हॉस्पिटल्स के लिए बचा कर रखे।