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साइबर सिक्योरिटी में मजबूत बिजनेस, जानिए TAC Security ने कैसे बनाई ग्लोबल पहचान

रोज बदल रही टेक्नोलॉजी में जाने कब किस तरह के नया मालवेयर या साइबर थ्रेट सामने आए इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
अपडेटेड Feb 24, 2020 पर 09:14  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रोज बदल रही टेक्नोलॉजी में जाने कब किस तरह के नया मालवेयर या साइबर थ्रेट सामने आए इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। लेकिन इसी प्रीकॉशन यानि साइबर सिक्योरिटी की ओर कंपनियों की तरफ से खर्च और रुझान बढ़ा है। हमारी आज की स्टार्टअप सक्सेस स्टोरी TAC Security ने इस बढ़ती डिमांड में मार्केट देखा और और कदम जमाए। टीम की मेहनत से आज सरकारी विभागों से लेकर बड़े कॉरपोरेट्स भी इनके क्लाइंट्स हैं। देखिए साइबर सिक्योरिटी सर्विसेस देते इस स्टार्टअप की अब तक की कहानी।


बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी के साथ ही साइबर क्राइम का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में करीब 61 फीसदी साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए। साइबर अटेक के बढ़ते मामलों के चलते साइबर सिक्योरिटी का मार्केट बड़ा हो रहा है और स्टार्टअप्स इसमें मौके ढूंढ रहे हैं। 2013 में TAC Security ने भी इस सेगमेंट में कदम रखा और अब दुनियाभर में अपना लोहा मनवा चुके हैं।


19 साल की उम्र में Trishneet Arora ने TAC Security की शुरुआत की। मकसद साफ था कि साइबर की दुनिया में होने वाले फ्रॉड्स को रोका जाए। इसके लिए Trishneet ने AI बेस्ड प्रोडक्ट तैयार किया जिसके जरिए किसी भी कंपनी की साइबर सिक्योरिटी की सेहत का पता लगाया जा सकता है ताकि सही वक्त पर साइबर अटैक को रोका जा सके। इस प्रोडक्ट से एक बड़ा बिजनेस बनाने के लिए स्टार्टअप को निवेशकों का भी साथ मिला।


ये स्टार्टअप साइबर सिक्योरिटी को मजबूत बनाने के लिए अमेरिकी सरकार के साथ भी काम रहा है और इनका दावा है कि ऐसा करने वाले ये भारत के इकलौते स्टार्टअप हैं। TAC Security के मौजूदा 150 क्लाइंट्स में NPCI, CBI, गुजरात और पंजाब पुलिस से लेकर PSU, IT, इंफ्रा, डाटा और डिजिटल कंपनियां शामिल हैं। स्टार्टअप के मुताबिक वे हर साल करीब 1 ट्रिलियन डॉलर के ट्रांजैक्शन को AI के जरिए सिक्योर करने का काम कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2019 में कंपनी ने आय में 270 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की है। TAC Security को आगे भी इसी रफ्तार से ग्रोथ की उम्मीद है।


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