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स्वाभिमान से सफलता की कहानी, जानिए कैसे महिला किसान ने बदली सबकी सोच

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव की है जहां एक के किसान आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तीकरण के मामले में सबसे आगे गिने जा रहे हैं।
अपडेटेड Apr 12, 2021 पर 21:22  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हमें भारतीय होने पर गर्व क्यों है? वो क्या जो हमें दूसरों से अलग बनाता है? ये हमारी आत्मनिर्भर होने की क्षमता ही है जो हमें एक अलग पहचान देती है। ITC की प्रस्तुती और नेटवर्क 18 की पहल - स्वाभिमान भारत, हमारी ये खास पेशकश देश भर से कुछ ऐसी ही आत्मनिर्भरता की कहानियां आपके सामने हफ्ते दर हफ्ते लेकर आ रही है।  यह कहानी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव की है जहां एक के किसान आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तीकरण के मामले में सबसे आगे गिने जा रहे हैं।


कृष्णावती उत्तर प्रदेश में बस्ती जिले के नागपुर गाँव की एक ऐसी ही किसान हैं जिनके पास खेती करने के लिए अपनी खुद की जमीन नहीं थी। पर फिर भी इन्होंने 2012 में मशरूम की खेती शुरू की और आज ये मशरुम फार्मिंग से मिलने वाले पैसे से अपने परिवार का खर्च उठी रही हैं। और साथ ही अपने बच्चों की शिक्षा के लिए भी खर्च कर रही हैं।


कृष्णावती से प्रेरित होकर उनके अपने ही गाँव के लगभग 60 से 70 लोगों ने भी मशरूम की खेती शुरु कर दी है और इस तरह इस गांव के आसपास का सारा क्षेत्र मशरूम की खेती का केंद्र बन गया है।


यूपी के राज्यपाल ने इन सभी को इनके योगदान के लिए सम्मानित किया है, और राज्यपाल के कोष से नकद पुरस्कारों की घोषणा भी की है।


कृष्णावती और मशरूम की खेती करने वाले ये सभी किसान स्वाभिमान भारत के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं और दूसरों के लिए एक शानदार उदाहरण पेश कर रहे हैं।


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