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IT employees की नौकरी बचाने संबंधी PIL पर 15 मई को सुनवाई करेगा Supreme Court

इस PIL के माध्यम से NITES ने मांग की है कि सरकार उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करे जो आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 और धारा 58 का उल्लंघन करते हैं।
अपडेटेड May 09, 2020 पर 13:48  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सुप्रीम कोर्ट 15 मई को कोरोनोवायरस प्रकोप के कारण आईटी / आईटीईएस कर्मचारियों को काम से निकाले जाने से संबंधित जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा। ये जनहित याचिका, महाराष्ट्र की आईटी यूनियन, राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी कर्मचारी सेना (NITES) द्वारा दायर की गई थी।


याचिका दायर करके यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा की जाए और उन्हें अनुच्छेद 14, 19 (1) (जी) और 21 के तहत उनके गारंटीकृत अधिकारों को नजरअंदाज करके अवैध रूप से बर्खास्त न किया जाए।


गौरतलब है कि अनुच्छेद 14 कर्मचारियों को भेदभाव से बचाता है, अनुच्छेद 19 (1) (जी) किसी भी पेशे को अपनाने या व्यापार या कारोबार करने का अधिकार प्रदान करता है और अनुच्छेद 21 उन्हें जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है।


इस PIL के माध्यम से NITES ने मांग की है कि सरकार उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करे जो आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 और धारा 58 का उल्लंघन करते हैं।


ये याचिका केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जारी की गई सलाह के बावजूद कर्मचारियों की बर्खास्तगी और उनकी पगार पर रोक के मद्देनजर है दायर की गई है।


याचिका में कहा गया है कि देश की विभिन्न आईटी कंपनियों ने कर्मचारियों की अवैध सामूहिक बर्खास्तगी, वेतन पर रोक या अवैध रूप से वेतन में कटौती करने का एक अभियान शुरू किया है।


याचिका में कहा गया है कि यदि निजी कंपनियों को कोई बाध्यकारी निर्देश / अनुदेश जारी नहीं किया गया तो हजारों कर्मचारियों को उनकी नौकरी / आमदनी खोने की आशंका रहेगी जिससे एक अप्रत्याशित आर्थिक स्थिति पैदा होगी और ये एक ऐसी स्थिति जिसे देश बर्दाश्त नहीं कर सकता है। इस याचिका में यह मुद्दा भी उठाया  गया है कि आईटी कंपनियों के वेतन में कटौती से कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।


मनीकंट्रोल ने इस याचिका की कॉपी का अवलोकन किया है जिसमें  कहा गया है कि सामूहिक रूप से अनियमित बर्खास्तगी, वेतन में विलंब या वेतन में कटौती से कर्मचारियों पर बड़ा और गंभीर असर होगा और ये कर्मचारियों को अनुच्छेद 14, 19 (1) (जी) और 21 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का हनन भी है। कर्मचारियों की तरफ से इस याचिका की पैरवी वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत करेंगे।


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