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रेवेन्यू सेक्रेटरी के साथ, टैक्स की पाठशाला

प्रकाशित Tue, 05, 2019 पर 07:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी आवाज़ के साथ खास बात-चीत में रेवेन्यू सेक्रेटरी अजय भूषण पांडेय ने बजट के बाद इनकम टैक्स में मिली राहत की बारीकियां समझाईंI अजय भूषण पांडेय ने इस बातचीत में कहा कि मिडिल क्लास को ज्यादा फायदे की जरूरत और कम आय वालों को टैक्स रिलीफ की जरूरत है। 5 लाख कमाने वालों पर टैक्स बोझ ज्यादा है। एक्जम्पशन देने से सरकार पर बोझ ज्यादा है। सबको फायदा देने के लिए पर्याप्त फंड नहीं है।


उन्होंने आगे कहा कि 5 लाख से कम इनकम पर भी आईटीआर जरूरी है। टैक्स बेस कम करने का जोखिम नहीं लिया जा सकता। सरकार की कोशिश है कि टैक्स बेस कम ना हो और बोझ भी ना बढ़े। 2.5 लाख से ज्यादा इनकम पर रिटर्न फाइल करें। रिटर्न भरने की प्रक्रिया पहले से काफी आसान हो गई है। टैक्स रिटर्न पाना भी पहले से अब काफी आसान है।


टैक्स स्लैब में राहत क्यों नहीं? इस सवाल पर अजय भूषण पांडेय ने कहा कि टैक्स स्लैब तय करना जरूरी होता है। टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्स कैलकुलेशन होता है। टैक्सपेयर्स के पैसे से ही देश का विकास होता है। देश के विकास के लिए टैक्स भरना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि बजट में कम कमाने वालों को टैक्स राहत देने की कोशिश की गई है। मुख्य बजट के समय सलाह के आधार पर एक्शन लिया जाएगा। अंतरिम बजट में ज्यादा राहत देना मुश्किल होता है।


एलटीसीजी पर राहत क्यों नहीं? इस सवाल पर अजय भूषण पांडेय ने कहा कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के पीछे अपना तर्क है। पूरी दुनिया में इक्विटी पर एलटीसीजी लगता है। अंतरिम बजट में एलटीसीजी पर कोई विचार नहीं किया गया। घर के सौदे में कैपिटल गेन्स लिमिट क्यों ? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि कैपिटल गेन की कोई सीमा तय करनी होगी। कैपिटल गेन में सरकार की भी भूमिका होती है। सिर्फ सामाजिक वजहों का हवाला देकर राहत संभव नहीं है। घर की कीमत करोड़ों में हो सकती है तो टैक्स जरूरी है। 2 करोड़ रुपये तक की लिमिट एक व्यावहारिक कदम है। देश के विकास के लिए टैक्स लगाना भी जरूरी है।