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इंडस्ट्री की नजरें फेस्टिव सीजन पर, क्या ठंडे बाजार में भरेगा जोश

कोरोना और लॉकडाउन की मार आगे फेस्टिव सीजन पर ना पड़े इसके लिए इंडस्ट्री अभी से तैयारी में जुट गई है।
अपडेटेड May 29, 2020 पर 09:50  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कोरोना और लॉकडाउन की मार आगे फेस्टिव सीजन पर ना पड़े इसके लिए इंडस्ट्री अभी से तैयारी में जुट गई है। डिमांड में कमी की आशंकाओं को देखकर माइक्रो और स्मॉल सेगमेंट की इंडस्ट्री मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग की खास स्ट्रैटेजी बना रही है।


लॉकडाउन से बाजार में डिमांड की कमर टूट गई। जेम्स ज्वेलरी, महंगे गिफ्ट आइटम, हैंडीक्राफ्ट, डिजायनर कपड़े , बुटिक, एसेसरीज की महीनों बंद पड़ी रहीं। हालांकि अब लॉकडाउन में रियायत के बाद दुकानें खुली हैं लेकिन खरीदार बाजार से गायब। इसलिए अब फेस्टिव सीजन पर उम्मीदें टिकी हैं लेकिन डिमांड में सुस्ती के देखते हुए फेस्टिव सीजन को लेकर भी इंडस्ट्री बहुत उत्साहित नहीं है। इसलिए पहले से ही अपने बिजनेस के 75 फीसदी तक करने का फॉर्मूला तैयार किया गया है। 


संकट सिर्फ कम डिमांड और प्रोडक्शन का ही नहीं है। लेबर भी इस वक्त मिल नहीं रहे। ऐसे में अब स्पेशल इंसेंटिव स्कीम औऱ दूसरी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं ताकि फेस्टिव सीजन में लेबर की दिक्कत ना हो। 


दिपावली, छठ से लेबर के लौटने की उम्मीदें कम हैं और इधर फैक्ट्रियों में सैनिटाइजेशन पर ज्यादा वक्त लग रहा है। समय के साथ साथ पैसे का भी दबाव इंडस्ट्री पर बढ़ गया है।  कम डिमांड में लागत कम रखते हुए कारोबार करना बड़ी चुनौती है। कारोबारियों ने फेस्टिव सीजन को सहारा मान लिया है पर कोरोना से चोट खाए कंज्यूमर का भरोसा जीतना क्या इतना आसान होगा।


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