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इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए चीन पर निर्भरता होगी कम , लोकलाइजेशन की शर्त कड़ा करने की तैयारी

इलेक्ट्रिक गाड़ियों में चीन के बने कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करने के लिए भी तैयारियां तेज हो चुकी हैं।
अपडेटेड Jun 23, 2020 पर 11:37  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इलेक्ट्रिक गाड़ियों में चीन के बने कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करने के लिए भी तैयारियां तेज हो चुकी हैं। जहां सरकार ईलेक्ट्रिक गाड़ियों को मिलने वाली सब्सिडी के लिए जरूरी लोकलाइजेशन की शर्तों को कड़ा करने पर विचार कर रही है, वहीं कंपनियां भी अब कंपोनेंट्स और बैटरी के लिए चीन के अलावा बाकी देशों के विकल्प पर विचार कर रही है।


बता दें कि अलग-अलग कंपोनेंट्स के लिए लोकलाइजेशन समय सीमा अलग-अलग है। अक्टूबर 2020 से प्लास्टिक बॉडी के इंपोर्ट पर छूट खत्म हो रही है। इसी तरह कई और कंपोनेंट्स के इंपोर्ट पर छूट खत्म हो रही है। 2021 तक ज्यादातर EV कंपोनेंट का लोकलाइजेशन होगा। इससे बैट्री मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी पर असर पड़ेगा ओर चीनी लीथियम आयन बैट्री पर निर्भरता कम होगी। लीथियम के लिए अर्जेंटीना, बोलिविया, चिली पर नजर है। अब भारत में बैट्री की  गीगा फैक्ट्रियां बनेंगी। कंपनियां सप्लाई चेन पर दोबारा विचार कर रही हैं। 5 साल में भारत को EV मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी में सरकार EV इंडस्ट्री पर व्हाइट पेपर तैयार कर रही है।


सीमा पर चीन से झड़प और तनातनी बढ़ने के बाद अब चीन को आर्थिक चोट पहुंचाने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में चीन से बड़ी तादाद में होने वाले सोलर इक्विपमेंट के इंपोर्ट को घटाने के लिए घरेलू मैन्यूफैक्चिरिंग को बूस्ट देने का फैसला हुआ है। इसके लिए जल्द ही सरकार नई स्कीम का एलान करने वाली है। सूत्रों के मुताबिक MNRE ने इस पर शॉर्ट-लॉन्ग टर्म की रणनीति बनाई है। जिसके तहत पैनल, सेल्स, मॉड्यूल, कंट्रोलर्स के इंपोर्ट पर लगाम लगाई जाएगी।  सूत्रों के मुताबिक जल्द ही VGF मॉडल पर नई स्कीम की घोषणा होगी। VGF प्रोजेक्ट कॉस्ट का 25-35 फीसदी हो सकता है। कंपनियों को VGF ऑक्शन के आधार पर मिलेगा। इस नई स्कीम का फायदा Adani green, TPREL, Vikram Solar और Azure Power जैसी कंपनियों को मिलेगा।




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