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Covid-19: तिरुपति मंदिर को 400 करोड़ का नुकसान, कर्मचारियों को सैलरी देने का है संकट

TTD के अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना वायरस के चलते मंदिर को 50 दिन से अधिक बंद रहने के कारण ट्रस्ट को 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है
अपडेटेड May 12, 2020 पर 15:42  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना वायरस के चलते आर्थिक नुकसान अब मंदिरों में भी पहुंच गया है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (Tirumala Tirupati Devasthanams -TTD) ने कहा है कि 50 दिन से अधिक मंदिर बंद रहने के कारण ट्रस्ट को 400 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। मंदिर में हर दिन 80,000 से 100,000 भक्त हर दिन आते हैं। लेकिन पिछले क महीने से अधिक समय से एक भी भक्त दर्शन करने नहीं आए हैं। जिससे मंदिर को तगड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।


मंदिर को मौजूदा समय में आर्थिक तंगी चल रही है। उसके पास पर्याप्त कैश नहीं है। मंदिर अपने कर्मचारियों को सैलरी देने और रोजाना के खर्चों को पूरा करने में दिक्कत आ रही है। 


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया के सबसे धनी ट्रस्ट ने पहले से ही सैलरी, पेंशन, और अन्य निश्चित खर्चों का भुगतान करने पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। मंदिर का पास 8 टन सोने का भंडार है और 1400 करोड़ रुपये की FD है। फिलहाल मंदिर प्रशासन सोने के भंडार और FD पर बिना हाथ लगाए स गंभीर आर्थिक समस्या से उबरने की तलास कर रहा है।


मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन वाई वी सुब्बा रेड्डी (YV Subba Reddy) ने बताया कि TTD अपने कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन देने के लिए मजबूर है। इसके अलावा रेवेन्यू न होने के बावजूद भी अन्य तय खर्च करने होते हैं। TTD विभिन्न कार्यों के लिए सालाना 2,500 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। रेड्डी ने कहा तिरुमला मंदिर में हर महीने औसतन 200-220 करोड़ रुपये की इनकम होती है। लेकिन लॉकडाउन के बाद कोई इनकम नहीं हुई है।
बताया जा रह है कि तिरुपति मंदिर ने फिस्कल ईयर 2020-21 के लिए 3,309.89 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया था। लेकिन 20 मार्च को मंदिर बंद होने के चलते अकेले हंडी कलेक्शन में ही मंदिर को 150-175 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। इसके अलावा दर्शन के टिकटों की बिक्री भी बंद है और प्रसाद, दान से मिलने वाला रेवेन्यू भी बंद हो गया है।


फिस्कल ईयर 2020-21 क लिए मंदिर ने कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों के लिए 1385.09 करोड़ रुपये तय किए थे। लॉकडाउन के दौरान आमदनी नहीं होने के बावजूद मंदिर 120 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इन सबके अलावा मंदिर अस्पताल समेत अन्य संस्थाओं को तकरीबन 400 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता करता है।


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