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नोटबंदी के दौरान मजदूरों के खातों से हुआ करोड़ों का लेन-देन, जानिए पूरा सच

नोटबंदी के दौरान देश के कई हिस्सों में पूंजीपतियों ने गरीब, मजदूर लोगों के खाते में अवैध रूप से पैसे जमा किए थे।
अपडेटेड Jul 23, 2019 पर 08:52  |  स्रोत : Moneycontrol.com

8 नवंबर 2016 की रात जब पीएम मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की तो सभी भौचक्के रह गए। इसके बाद नोट बदलने का जो सिलसिला शुरु हुआ और किस तरह से अवैध रकम को खपाई गई और उसकी निकासी की गई। उसकी परत दर परत तह खुल रही है। नोटबंदी के दौरान उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर में 40 से ज्यादा खातों में पांच से दस करोड़ रुपये जमा किए गए। बाद में धीरे-धीरे इन्हें निकाल लिया गया।


इनकम टैक्स को जब इतनी बड़ी रकम की भनक लगी, तो जांच पड़ताल शुरु कर दी। जांच में पता चला कि ये सभी खाताधारक बिहार के मजदूर हैं, जो कानपुर मजदूरी करने आये थे। उन्हें तो पता भी नहीं है कि उनके नाम का बैंक एकाउंट भी है। इस पूछताछ के बाद इनकम टैक्स को सारा माजरा समझने में देर नहीं लगी। इनकम टैक्स विभाग का कानपुर स्थित जांच निदेशालय नोटबंदी के बाद खातों में जमा और निकासी के मामलों की गहनता से पड़ताल कर रहा है।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक कानपुर में पांच से 10 करोड़ रुपये तक की जमा निकासी के 40 मामले सामने आए हैं, जबकि समूचे यूपी और उत्तराखंड में ऐसे मामलों की संख्या 174 है। ये सभी मामले फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने बैंकों से मिले ऑनलाइन डाटा की छंटनी के बाद पहचान किए हैं।


इनकम टैक्स के अफसर पूरा माजरा समझ चुके हैं कि नोटबंदी के दौरान मजदूरों को मोहरा बनाकर काली कमाई को सफेद किया गया है। इनकम टैक्स के अधिकारी अब हर खाते की जांच में बैंकों को भी शामिल करेंगे। खाता खोले जाने के समय लिए गए दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं।


बैंकों से पूछा जा रहा है कि इतनी बड़ी रकम निकालने के लिए कौन आता था। इसके अलावा मजदूरों से भी यह जानकारी जुटाई जा रही है कि नोटबंदी के दौरान या उससे पहले किस जगह काम करते थे।


प्रधान निदेशक अमरेंद्र कुमार का कहना है कि यह जांच बड़ी जटिल है। लेनदेन का कोई सीधा सुराग नहीं मिलने से अब कड़ी से कड़ी जोड़ी जा रही है। मजदूरों और बैंकों से मिल रही एक-एक सूचना के जरिए उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जिन्होंने नोटबंदी के दौरान अरबों रुपये का काला धन सफेद किया।