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आरबीआई और वित्त मंत्रालय में मतभेद बरकरार!

प्रकाशित Wed, 28, 2018 पर 11:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के बीच अब भी नकदी की हालत को लेकर मतभेद बने हुए हैं। एक तरफ जहां आरबीआई का कहना है कि क्रेडिट ग्रोथ अच्छी है, वहीं सरकार को लगता है कि रिजर्व बैंक को सिस्टम में नकदी डालनी चाहिए। पिछले दिनों हुई रिजर्व बैंक की बोर्ड बैठक में इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क के लिए जो समिति बनाने का फैसला हुआ था, उसका हेड कौन होगा इसे लेकर भी सरकार और आरबीआई में मतभेद है।


दरअसल इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क यानि ईसीएफ पैनल हेड के लिए आरबीआई और सरकार के अलग-अलग प्रस्ताव हैं। सरकार चाहती है बिमल जालान आरबीआई पैनल के हेड बनें, लेकिन आरबीआई ने राकेश मोहन के नाम का प्रस्ताव रखा है। राकेश मोहन मानते हैं कि आरबीआई की ऑटोनॉमी कायम रहनी चाहिए। वहीं बिमल जालान के मुताबिक आरबीआई की सरकार के प्रति जवाबदेही होनी चाहिए। आरबीआई के सरप्लस फंड पर बिमल जालान, राकेश मोहन के मत अलग-अलग हैं। गौरतलब है कि वित्त मंत्रालय, आरबीआई के बीच कमिटी मेंबर्स और शर्तें तय करने पर चर्चा जारी है। पैनल समीक्षा करेगा कि आरबीआई को कितनी प्रोविजनिंग की जरूरत है।


वहीं क्रेडिट ग्रोथ पर रिजर्व बैंक का कहना है कि इस साल क्रेडिट ग्रोथ में अच्छी बढ़त देखी गई है। साल दर साल आधार पर नॉन फूड बैंक क्रेडिट में 15.9 फीसदी की ग्रोथ दिखी है। अप्रैल-जून तिमाही में एनबीएफसी की लोन ग्रोथ 17.9 फीसदी रही है जबकि जुलाई-सितंबर तिमाही में एनबीएफसी की लोन ग्रोथ 20.1 फीसदी रही है। एनबीएफसी की लोन ग्रोथ अच्छे क्रेडिट फ्लो को दर्शा रही है। वित्त वर्ष 2019 में एसबीआई की क्रेडिट ग्रोथ 5 साल की ऊंचाई पर रही है। हालांकि सरकार की दलील है कि अब भी लिक्विडिटी की दिक्कत है और लिक्विडिटी की दिक्कत से ग्रोथ पर बुरा असर संभव है।


हाल ही में, सीएनबीसी-आवाज़ के प्रबंध संपादक आलोक जोशी के साथ साक्षात्कार में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान ने कहा था कि सिस्टम में नकदी की दिक्कत नहीं है, बल्कि डिमांड की कमी है।